सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 92, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें७६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
८-विफल-अस्त, कोई अधिषत्रुगृही या पाप युक्त को भी कहते हैं ।
९ खल-पाप युक्त या पाप वर्ग में या पाप राशि में कोई नीच या पराजित को
भो कहते हैं । ;
१० दीन दुःखी-नीच गृही । कोई शत्र क्षेत्री को भी कहते हैं ।
११ हीन-नीचाभिमुख ( अवरोही ग्रह ) ।
१२ सुदीर्य-आरोही ।
१३ पीड़ित-पाप ग्रहों से दबा 1 अन्यमत से अस्त ।
१४ निपीड़ित-दूसरे ग्रहों से पराजित ।
१५ पीड़-राशि के अन्त में ।
१६ मुषित-अस्त ।
१७ कोपी-क्रू ग्रहों से युक्त । अन्यमत से कोपिष्ट या कोपी (विकल) अस्त ।
१८ दुःखी या अतिदुःखित-शत्र गृही ।
१९ भीत-नीच गुही । अन्य मत से शत्र गृही या अतिचर 1
२० बाल-वक्र ग्रह ।
२१ सुप्त या क्ष घित-शत्र गृही या शत्र युक्त या दृष्ट व शनि से युवत ।
२२ क्षोभित-सूर्य युक्त और पाप दृष्ट या अपने शत्र से दृष्ट ।
२३ तृषित-जलचर राशि में केवल पाप दृष्ट या अपने शत्र से दृष्ट, शुभ ग्रह से
अदृष्ट ।
२४ लज्जित-पंचम में पापयुक्त ग्रह (ग्रह अपने पुत्र की राणि में तथा पाप युवत) ।
उपरोक्त संक्षेप में
१ दीप्त-उच्च में ।
२ श्वस्थ-स्वगृही ।
३ मुदित, हृषित या संतोषी-मित्र गृही या शुभ गृही 1
४ शांत-मित्र गृही या शुभ वर्ग में ।
५ विकल, पीड़ित, मुषित, कोपिष्ट या कोपी-अस्त ।
६ गवित या सुखित-उच्च या मूलत्रिकोण में ।
७ शक्त-उदित ।
८ खल, दीन या भीत-नीच गुही ।
९ खला, विकल या कोप-पापयुक्त, पापराशि या पाप वर्ग में ।
१० दीन, भीत, दुःखी, सुप्त, क्षुषित-शत्र, क्ष त्री ।
११ पीडित, निपीडित-पाप ग्रहों से दबा ।
. १९ निपीडित खल-पराजित ।
१३ क्षोभित सुर्य युक्त पापदृष्ट या शत्र, से दृष्ट ।
१४ प्रमुदित-अधिमित्र गृही ।