भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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७८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

स्वजन से परित्यक्त, बंधु विरोध, अनादर, नीच वृत्ति से उपजीविका; नाना

प्रकार के रोग से पीडा :

द हीन — समान फल, स्थानान्तर गमन, बन्धु वैर, दुःख, निदनीय वृत्ति से उप￾जीविक्ता, अपने जनों से त्यक्त, शरोर और मन रोगो, व्यर्थ का व्यापार ।

९ दुःखो या अति दुःखित--अनेक प्रकार के कष्ट से दुःखो मन, बिदेश यात्रा या विदेश

वान, राजा चोर या अग्नि से भय, शत्र, पीड़ा या भाई वहन नाश या कई

शोक ।

१० विक-कत्र, के पपञ्च से मन्द वृद्धि, मानसिक गड़बड़ी, अपमान, विफलता, मान￾मिक फष्ट, इष्ट मित्रों का मरण, बलक्षीण, मलिन, व्यर्थ भटकने वाला, अति

दुवेल, परोपकार रहित, कायं में आलस्य, पराये उपकार में अनादर, पिता

आदि का मरण; स्त्री पुत्र वाहन हानि, चोर से पीडा, नोति रहित, सदा

दुःखी, भांति, स्नेह नाश, वस्त्रनाण, वुद्धि हानि, दुष्ट मित्र, पराया कार्य

विगाड़े, शत्रू वृद्धि, शत्रू, से पराजय, रोग की वृद्धि ।

११ खल--लगातार हानि, अचानक अइचनें,. झगड़ा, स्त्री साता पिता का वियोग,

शत्रुओं द्वारा भूमि धन नाश, दुष्टों से मुकदमा वाजी, परदेश वास, लोभी,

सज्जनों से निन्दा, स्वजनों का वियोग, क्रोधी, बुद्धि हीन, स्त्री बच्चों से

झगडा और वियोग, सदा दुःखी, बीमारी दुःख आदि, धन हानि, मित्रों से

कलह ।

१२ पोड्य-मित्रो और सम्बन्धियों से कलह फौजदारी मुकदमा आदि ।

१३ भीत्य--चोर और अग्नि से डर, अपमान ।

१४ कोपी--पाप कम में प्रवृत्ति, विद्या धन स्त्रो पुत्र और बन्धुओं की हानि, नेत्र में

रोग, यश और भूमि नाश, ' रोग, प्राण संकट, विष जन्तु भय, शत्रु भय,

ज्ञाति भय, राज भय, राजा से घन हरण, जुर्वांना, जप्तो आदि, एक पुत्र से

नलेश ।

१५ पीड़ित-अनेक व्याधि पीड़ित, दुव्यंसन से अपक्रीति, स्वस्थान त्याग कर अन्यत्र

अमण, बन्धु चिता से व्याकुलता, अपमान, वन्धन, कारागार, पराधीनता

आदि। ,

“१६ लज्जित--ईश्वर में अनिष्ठा, सुमति नाश, व्ययं भ्रमण, कलह में रुचि, धर्म में

अरुचि ।

१७ क्षोभित--द रिद्रता, कुबुद्धि, कष्ट, धन नाश, पैरों में आघात, राजा से क्रोध, घन

में बाधा ।

१६ क्षुभित-शोक, मोह, परिजनों के सन्ताप से मानसिक व्यथा, शरीर में दुर्बलता,

: शत्रु ओं से कलह, घन हानि, बलह्वास, विषाद से बुद्धि कुण्ठित ।

१९ तृषित-स्त्रियों को रोग भय, बुकार्य में प्रवृत्ति, वन्धुओं के विवाद से धन हानि,