भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रहों की अवस्थाएँ और चन्द्र क्रिया: ७९

शरीर में दुर्बलता, दुष्टों द्वारा क्लेश और मान हानि, व्यभिचार, अपने

परिवार द्वारा चित्त में सन्ताप ।

संक्षिप्त में प्रदीप्त का अच्छा प्रभाव पुरा होता है । विकल में फल को बिलकुल

हानि हो जाती ë । बीच + अवस्था में क्रमानुसार फल घटेगा जैत्ती अवस्था होगी फल

अच्छा या बुरा उसो प्रमाण से होगा ।

दीप्त में सव कार्य साघे । स्वस्थ में आधा कार्य साघे। अतिदुःखित में शत्रु की

बहुत पीड़ा हो । विकल में रोगी होवे इत्यादि फछ का अनुमान करना । कुंडली का फल

कहने में ग्रहों की उपथु'बत अवस्था का विचार करना और व्यापार अवस्था आदि का

भी विचार करना जो आगे बताई गई है 1 ये 65 ग्रहों के वळ या निबंछता से भी अधिक

या न्यून फळ के द्योतक हैं । यहां अवस्था में किसो का शुभ किसी का अशुभ फल कहा

है केवल इतने से ही फल निश्चित नहीं होता । इसमें राशि शील, ग्रह शील, भाव,

आवेश, ग्रह कारक, ग्रह दृष्टि योग आदि सब विषयों पर विचार कर ग्रहों के बल के

अनुसार फलाफल निश्चित करना । इन सब के अनुसार इन अवस्थाओं के फल में भी

अन्तर पड़ जाता है और इन का फल उन ग्रहों को दशा में होता है ।

जिस २ भाव में क्षुधित या क्षोभित ग्रह हों उस भाव का नाश कर दुःख देते हैं 1

इन अवस्थाओं का भाव-विद्येष में फल

१ कर्म स्यान भे--लज्जित, तृषित, क्ष घित, या क्षोभित ग्रह हो तो वह सदा सुखी

रहता. ह ।

२ पंचम स्थान सॅ--लज्जित ग्रह हो तो उसका पुत्र नाश होता है या केवल, एक पुत्र

रह जाता है ।

३ सप्तम भाव में-क्षोभित या तुषित ग्रह हो तो उसकी स्त्रो मर जाती ë ।

बाल वृद्ध अवस्था विचार

N

राशि | विषम राशि सम राशि | अवस्था का क्ला

रा०के अंश | में अवस्था | में अवस्था फल

१ १से६०तक वाल मृत बालं (घोडा फलः

š = उन्तति शील ६ से १२०, कुमार वृद्ध कुमार आघा फल=सुखी

१२से १८°,| तरुण तरुण तरुण पूर्ण फल=राजा हंसल मे !

१८से२४०,। वृद्ध कुमार बुद्ध र्द फल=अनिष्ट फल, रोग

२४्से ३०, मृत बाल मृत शून्य फश=मरण