सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें८० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
बाल में प्रभाव नहीं के बराबर है | कुमार १२ वर्ष तक रहता है तब ग्रह का कुछ
अच्छा या आघा प्रभाव पड़ता है । तीसरी श्रेणी तरुण की है उसमें सबसे अधिक प्रभाव
या ग्रह का पूरा प्रभाव पड़ता है । चतुथं श्रेणी वृद्ध की है, जब शित क्षीण हो जाती है
बहुत कम फल देने की शक्ति रहती हैं परन्तु जान परिपक्वता बढ़ जाती है इस सम्बन्ध
में विचार किया जा सकता है । पांचवीं अंतिम अवस्था मृत्यु की है यहां ग्रह की शक्ति
बिलकुल ही नहीं रहती उस समय वह कुछ फ देने योग्य नहीं रहता ।
शुक्र, गुरु, का चन्द्र बाल-वृद्धत्व
शुक्त--जब पूर्व में उदय हो-३ दिन तक बालक । पश्चिम में उदय हो तो १० दिन तक
बालक । अस्त होने के ५ दिन पहिले वृद्ध ।.
गुर--?५ दिन वाल ओर वृद्ध रहता है । अन्य मत-वृद्धत्व में ५ दिन, बालकत्वमें ३
दिन, शुभ कार्य में वजित ।
चन्द्र-३ दिन वृद्धत्व, आधा दिन बालकत्व, ३ दिन अस्त ।
वृद्ध ग्रह-राहु, सूर्य, गुरु, शनि; ग्रह वृद्ध ग्रह Š ।
लग्न में चन्द्र और शुक्र हो तो न तो अति वृद्ध स्वभाव वाला और न तरुण
अवस्था का स्वभाव वाला ग्रह है ।
स्वप्नादि अवस्था
राशि के अंश | विषम राशि में | सम राशि में अवस्था फल १ से १०° तक | जागृत सुषुप्ति १ जागृत-कार्य साधन करने वाली
१०से २००तक | स्वप्न स्वप्न २ स्वप्न-मध्यम फल वाली
qoq ३०°तक | सुषुप्ति जागृत ३ सुषुप्ति-निष्फल
१ जाग्रत=अपनी राशि या उच्च में-पूर्ण फल
२ स्वप्न = मित्र या सम के गृह में-शून्य फल
३ सुषुप्ति = शत्रु या नीच स्थान में-शून्य फल
ग्रहों की १२ चेष्टाएँ
जन्म काल में कोन ग्रह बया चेष्टा करता है उसी प्रमाण में उसकी चेष्टा का फल
होता ë । यह गणित में इस प्रकार निकाला जाता है--
रीति-ग्रह की राशि शोड़कर केवल अंश कला विकला लेना उसमें २ का गुणाकर ५ का
भाग देना जो अधिक हो उसी अनुसार चेष्टा होगी 1
जैसे लग्न में बुघ कन्या राशि के २५-३०-१५” पर है | इस पर से जानना
है जन्म समय बुघ को क्या चेष्टा थी ।
२५०-३०१५" x २ = १५-०-३० + ५=१० लब्धि है । ओर शेष बचा है
= ११ की चेष्टा, जिसका फल संताप या हानि है ।