भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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८२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय-फलित खण्ड

२१ शयनम्‌ “सोना -गरीद्री (२१) निद्रा

२२ अमृत पान -अमृत पीना -संतोष (२२) पानो पीना

२३ अलंकार -गहना पहिरना -संपत्ति प्राप्ति (२३) मीठा पीना *

२४ स्त्रीशाला पांप-स्त्रियों से प्रेमालाप -भोग (२४) घन प्राप्त रू

२२ संभोग “भोग -उदासी या निराशा (२५) मुकुट उतारना

२६ निद्रा -गहरी निद्रा -रोग (२६) गहरी निद्रा

२७ रत्न पारख-हीरा की परख “धन (२७) स्त्री योग

( * चिन्ह वाले में अन्य मत से अंतर है इसका, आगे और फल दिया ë )

किसो भी ग्रह का व्यापार जानना

( लग्न राशि संख्या x ग्रह की राशि संख्या ) + २७ = शेष

( शेष > ग्रह महादशा वर्ष ) + २७ = शेष = व्यापार क्रम--

विश्योत्तरी महादशा में जो वर्ष बताये Š वही यहाँ लेना ।

विशोत्तरी दशानुसार ग्रहोंके वर्ष

ग्रह | सूर्यं | चन्द्र , मंगल | राहु | गुर शनि | बुध | केतु | शुक्र

वर्ष | ६ | १० | ७ १८ | १६ | १९ |१७| ७ | २०

उदाहरण--मान लो इस कुंडली से मंगल का व्यापार जानना है ।

लर्न मंगल लग्न कुंडली

राशि राशि

३ x ८=२४=२७=देष २४

शष मंगल वषं

२४ X७=१६८-२७= ष्र =

शेष ६ = उपासना

मंगल का उपासना व्यापार आया फल

मेल आच्छा है । सूर्य का =

लग्न रातति सूये राशि सूर्य वर्ष `

३ x १२ x ६० २१६३ २७० ८३३ = शेष ° = २७ = रत्न पारख =

शुभ है घन देने वाली है । इसी प्रकार और ग्रहों का निकाल लेना । जब सूर्य की दशा

आवेगी तब घन लाभ होगा ।

अन्य प्रकार से ग्रहों का व्यापार निकालना

( लर्न संख्या + लग्न से ग्रह स्थान ) > q x ग्रह वर्ष + २७ ग्रह का व्यापार ।

जैसे सूर्य का व्यापार निकालना है :—