सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 108, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१०० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
पाप और शुभ दोनों से ही. बेध हो तो जो अधिक बली हो उसके अनुसार शुभ
अशुभ हो ।
इसी प्रकार ग्रहों का बल विचार कर वेध का फल कहना ।
राहु चंद्र वेध राहु गुरु वेध शुभ ग्रह के वेध
कष्ट मृत्यु लाभ
अन्य प्रकार से त्रिपताका चक्र में ग्रह स्थापित करना
चंद्रस्चंद्र ९ वर्ष तक भ्रमण कर उसी स्थान में आ जाता है। गत वषं में १
जोड़ने से वतमान वर्ष हो जाता है। वर्तमान वर्ष में ९ का भाग देने से जो राशि
बचती है उसी संख्या के अनुसार जन्म का चन्द्र गतिमान होकर आ जाता है। इस
कारण जन्म चन्द्र की राशि से शेष राशि की संख्या तक गिनने में जो आवे वहाँ
चन्द्र पहुँच जाता है जैसा ऊपर उदाहरण देकर बताया है।
राहु और मंगल=राहु और मंगल को स्थापित करने के लिए वर्तमान वषं संख्या
में ६ का भाग देने से जो शोष राशि प्राप्त हो, उतनी संख्या जन्म मंगल से सीधा
गिनकर और राहु के स्थान से उतनी संख्या उल्टी गिनने पर जो आवे उसी.राशि
पर मंगल और केतु रखना ।
रोष प्रहऱसूय बुध गुरु शुक्र शनि=वतंमान वर्षं में ४ का भाग देने से जो रोष
प्राप्त हो उतनी संख्या इन ग्रहों के स्थान से गिनकर रखना जैसा ऊपर वता चुके हैं।
उदाहरेण--अन्य रीति से यहाँ केवल राहु और मंगल में अन्तर बताया है और
सब ऊपर बताये अनुसार ही है। गतवर्ष
=शेष ३ जन्म का मंगल वृद्चिक में था उससे
सीधा ३ गिना जो तीसरा मकर आया । मकर में
मंगल आ गया । राहु मिथुन का था उससे उल्टा
३ गिना तो तीसरा मेष आया । मेष पर राहु आ
४ गया इसी के अनुसार त्रिपताका चक्र यहाँ दिया है ।
त्रिपताका चक्र में चन्द्र बेध का विचार
(१) सूर्य के साथ वेध-धन के अपव्यय से कष्ट, मन में अस्थिरता, चिता से
परेशानी,रक्त सम्बन्धी रोग हो,पित्त का विकार हो। यह फल सूर्य की मुद्दा दशा में हो।
(२) मंगल से वेध-चित्त में बेचैनी, रक्त विकार, शत्रु भय, मन उदास ।
(३) बुध से वेध-व्यापार में वृद्धि, भाइयों से विवाद, कुटुम्ब में कलह, शत्रु
से हानि। | लल
- (७) गुरु से-अकस्मात् धन लाभ, तीर्थ यात्रा, शुभ कार्य में खर्च, विवाद में
जय, मांगलिक कार्य हो ।
Mies. es