भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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विशोंत्तरी मुद्दा दशा : १०१

(४) शुक्र से--वासना वढे, व्यभिचार की ओर मन, धन लाभ, विद्या प्राप्तिं

शत्रु पर जय, परीक्षा में सफलता, बात रोग, जल से अरिष्ट ।

(६) शनि से--वायु विकार आदि से रोग, परिचित व्यक्ति धोखा देवे जिससे

धन हानि हो, नीच का संग ।

(७) राहु -असफलता, कठिनाइयाँ, बुरे विचार, अनेक रोग, मलिन चित्त ।

(८) केतु से--अस्वस्थता, मंदारिन, उदास, मलिन चित्त, उदर व्याधि,दुःख ।

(९) यदि कई पाप ग्रहों से वेध हो तो उस वर्ष कष्ट और बहुत दुःख हो ।

(१०) भाग्येश का अष्टमेश से वेध हो तो रोग और हानि प्रद है।

(११) आयेश और राज्येश का या लाभेश भाग्येश का परस्पर वेध हो तो लाभ

एवं सुख कारक होता है । र

(१२) ये फल बेध कारक की दशा में होते हैं । हषं वल के अनुसार बल उस वेध

कारक ग्रह का देखना । निवंल ग्रह हो तो कष्ट, वलवान्‌ हो तो सुख दायक होगा ।

अध्याय १३

विशोत्तरी मुद्दा दशा

मुद्दा दशा र

मुद्दा को मुग्धा भी कहते हैँ । मुग्धा-युव्रा स्त्री,इस में ९ ग्रह की दशा. होती है

इसकी दशा का क्रम विशोत्तरी दशा के अनुसार होता है । इस कारण इसे

विशोत्तरी भी कहते हैं । विशोत्तरी दशा १२० वर्ष में पूरी होती है परन्तु यह दशा

१ वर्ष-३६० दिन में पूरी हो जाती है। १२० वर्ष ३६० दिन के बराबर हैं तो १

वर्ष-ह$& दिन ३ दिन के होता है। इस कारण विशोत्तरी दशा वर्ष में ३ का गुणा

करने से जो संख्या प्राप्त हो उतने दिन मुद्दा दशा में उस ग्रह के होते हैं। जैसे-

ग्रह सूर्य चंद्र मंगल राहु गुरु शनि बुध केतु शुक्र योग

१२ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९

विशो० दशा में ग्रह वर्ष ६१० ७ १५ १६ १९ १७ ७ २० १२०

मुद्दा दशा में वर्ष % ३-दिन १८ ३० २१ ५४ ४८ ५७ ५१ २१ ६० =३६०

मुद्दा दशा निकालना

(जन्म नक्षत्र संख्या + गताव्द)-२ - :

९ (=शेष मुद्दा दशा नीचे बताये क्रमानुसार ।)

शेष LEG NN ES SP ६७७००२

RIC! 7107.