भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 136

१२८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

क्षेपक जानना । विशेष क्षेपक कोई और ग्रह या भाव होता है वह सहम साधन

की क्रिया में स्पष्ट बता दिया गया है ।

(११) सहम के नाम आगे दिये हैं :--

सहम साधन की क्रिया ( इसके अतिरिक्त शुद्धाश्वय संस्कार भी करना )

शोधक जिसमें से शोध्य जो जो जोड़ना

क्रम नाम सहम समय घटाना घटाना है है

१ पुण्य सहम दिनि में चंद्र सुर्य +लग्न

रात्रिमें . सूर्य चंद्र +छग्न

२ गुरु सहम दिन सूर्य चंद्र न-ल्ग्त रात चंद्र सूर्ये लग्न है| विद्या,, ज्ञान, शनि, ,

३ यश सहम दिन बृहस्पति पुण्य सहम %छग्न

देहन्वपु-तनु रात पुण्य सहम वृहस्पति जलमग्न * बल सहम सैन्य ,, . . घात ,, | -

४ मित्र सहम गुरु सहम पुण्य सहम > शुक्र

रात पुण्य सहम गुरु सहम +शुक्न

इसमें शोध्य और शुद्धाश्रय के बीच शुक्र न हो

तो १ राशि जोड़ना

शर महात्म सहम शौयं ,, द्नि पुण्य सहम . मंगळ +छग्त

महात्मय ,, रात मंगल पुण्य सहम + लग्न टे वीरत्व ,, र

) धैये ,, *

SR ६ “आशा सहम दिन शनि शुक्र +लग्न / हं इच्छा ,, रात शुक्र शनि न॑-छूग्न

| 16 । _ राज सहम दिन श्नि सूयं * #- छग्न द तात ,, रात सूयं शनि + लग्न

2 गर डु

येक मातृ सहम | दिन चंद्र शुक्र नग्न

द माता ,, रात मुक्त चंद्र ` लग्न कांति ,, (इन जन

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४ · पृष्ठ 136, कुल 280 में से · BharatKosha