भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 144

Sa IETO Sd Ii Ro °> Rf 2% | छ

१३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वषेफल खण्ड

(१५) पानीय पतन (१६) प्रसूत सहम (१७) जाडच सहम

=हस्त सहम वृहस्पति ५- २-१८-३० मंगल १०- २-४६-२१

इति २-१२- १- १ -बुध ११-१०-२३-१४ शनि २-१२- १- १

-चन्द्र १-१६-४४-२० “शेष ५-११-५५-१६ रेष ७- २-४५-२०

रेष ०=२५-१६-४१ पलग्न ५- ४-१३-१६ +वुध ११-२०-२३-१४

फल्न ५- ४-१३-१६ योग १०-१६- ८-३२ योग ६-२३ ८-३४

योग= ५-२९-२९५७ शु० + १ झु०+ १

हु०--१ ११-१६- ८-३२ ७-२१३- ८-३४

। =६-२९-२९-५७ यहाँ मं० के आगे श० के भीतर वुध है इसमें १ जोडा

(१८) शत्रु सहम (१९) बन्धन सहम (२०) दरिद्र सहम

मंगल १०- २-४६-२१ पुण्यसहम ८-१५-२४-२७ पुण्यसहम ८-१५-२४-२७

-शनि २-१२- १- १ -शनि २-१२- १- १ -वुध ११-२०-२३-१४

शेष ७- २-४५-२० दोष ६- ३-२३-२६ शेष ८-२५- १-१३

नलरत ५ ४-१३-१६ छगन ५- ४-१३-१६ "बुध ११-२०-२३-१४

योग ०- ६-५८-३६ योग ११- ७-३६-४२ योग ८-१५-२४२७ शु० + १

९-१५-२४-२७

(२१) गुरुता सहम (२२) जल मागं ऐसी परिस्थिति में पुण्य सहम सूयं उच्च ०- १- ०-० कर्काद्धं २-१५ ०- ९ और वुध के वीच वुध समझ --सू्यं ११- ५-३३- ९ -शनि २-१२ १- १ १ जोड़ा ।

शोष ०-२५-२६-५१ शेष १- २-५८-५९ (२३) सामर्थ सहम

मलग ५- ५-१३-१६ भछग्न ५- ४-१३-१६ मगल १०- २-४६-२१

योगः ५-२९-४० ७ योग ६- ७-११-१५ छग्नेशवृध ११-२०-२३-१४

शु० +१ शु०न १ दोष १०-१२-२३- ७

६-२९-४०- ७ ७- ७-१२-१५ क्लग्न ५- ४-१३-१६

नट ३-१६-३६-२ ३

  • (२४) काम सहम (२५) गौरव सहम (२६) कार्य सिद्ध

चंद्र. १-१६-४४-२० वृहस्पति ५- २-१८-३० शनि २-१२- १० १

*लरने शबुध११-२०-२३-१४ “चंद्र. १०१६-४४-२० सूर्य ११- ५-३३- ९

` शेष १=२६-११- ६ शेष ३-१४-३४-१० रोष ३- ६-२७-५२ कलन ५- ४-१३-१६ +सूर्यराशि११- ५-३३- ९ +सूर्यराशि५-२-१८-१०

र मीनेश गुरु

योगः 5० ०२४-२२ योगः ८-४६-२२ ८- योग ८- ८-४६-२२

शु? १ शु० +१ शु० +१

सप" ०२४-२२ =३-२१- ७-।९ ९- ८-४६-२२

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४ · पृष्ठ 144, कुल 280 में से · BharatKosha