सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 145, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंसहम विचार : १३७
वृहस्पति के आगे सुर्यं राशि ये
चंद्र के भीतर पड़ती है इस
कारण १ जोड़ा
(२८) बुद्धि सहम (२९) चतुष्पद सहम
_ पुण्य सहम ८ १५ २४ २७ वृहस्पति ५ १२ १८ ३० १२ भाव ४ ४ १५ १७
(२७) अस्व सहम
सूयं ११ ५२३ ९
शेष ९ ९ ५१ १८
१११ भाव ३ ४ १० १९
सयं११ ५ ३३ ९ -६ भाव१० ४ १५ १७ RSS)
दोष ५ २६ ४४ २१ दोष ६ ०
कलगन ५ ४ १३ १६ +लग्न ५ ४ १३ १६
'योग ० १४ १ ३७ योग११ ० ५७ ३७ योग११ ४ १३ १६
शु ०१-१ शु०+१
=° “२०-४५ ९-३७ ८०-४-१३-१६
(३०) गज सहम (३१) देशान्तर (परदेश) (३२) भ्रातृ सहम
चंद्र १-१६-४४२०
“गुरु ५" २-१८-३०
शेष ८-१४-२५५०
नरूग्न ५- ४-१३-१६
योग १-१८-३ ६
न्य ३) पुत्र सहम
बृहस्पति ५- २-१८-३०
धर्मे भाव १- ४-१७-१९ बृहस्पति ५- २-१८-३०
-धर्मेशशुक्र ०० ७-१९-४१ “शनि २-१२- १- १
शेष २-२०- ७-२९
नलग्तन ५- ४-१३-१६
दोष ०-२६-५७-३८
औलग्न ५- ४-१३-१६
योग ६- १-१०-५४ योग ७-२४-३०४५
शु०+१ शु०+१
=७— १-१०-५४ =८—२४-३०-४५
(३४) रोग सहम (चोर) (३५) बन्धु सहम
लग्न ५- ४-१३-१६ बुध ११-२०-२३०१४
-चंद्र -१६-४४-२० -चंद्र १-१६-४४-२० -चंद्र १-१६-४४-२०
दोष .. ३-१५-३४-१० रोष ३-१७-२७-५६ शेष १०- ३-३८-५४
भग्न ५- ४-१३-१६ तलग्न ५० ४-१३-१६ पल शा ४-१३-१६
योग ८-१९-४७-२६ योग ८-२१-४१-१२ योग ३- ७-५२-१०
शु०+१ शु०न-१
=९-१९-४७-२६ =९-२१-४१-१२
ऐसी परिस्थिति में लग्न और
चंद्र के बीच लग्न होना समझ
कर १ बढ़ाया गया ।