भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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१६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(३) तृतीय से--भाइयों का सुख और उन से धन की प्राप्ति, साहस, मार्ग,

नोकर, पितृ सम्वन्धी हानि ।

(४) चतुर्थ--माता और पिता से सुख, भूमि आदि का लाभ, गडी सम्पत्ति,खेत,

बाड़ी घर, वाहन का सुख, पिता का धन ।

(५) पंचम--विद्या और संतान का लाभ तथा गर्भपात का विचार, यन्त्र-मन्त्र,

पुत्र-कन्या, गर्भनेत्र, धन का उपाय ।

(६) षष्ठ--रोग, मामा, शत्रुभय, शरीर क्लेश, पशु, पराश्रय, भथ, घाव, फोड़ा आदि ।

(७) सप्तम--स्त्री, व्यापार, खोई हुई चीज, भूले-भटके की वात-चीत, चोरी

गया द्रव्य, रास्ता, यात्रा, झगड़।। सप्तम में कोई ग्रह रहने से अच्छा फल नहीं देता । यदि शुक्र हो तो कामी होता है ।

(=) अष्टम--पुर्वजनों का धन, मरे हुए की सम्पत्ति, संग्राम, शत्रु, किले की चढ़ाई का विचार, मरण विचार, नष्ट धन का, परिवार का तथा मानसिक दुःख का विचार, युद्ध से भय,आयु । इसमें मरण विचार इस प्रकार है, अष्टम भाव की नवांश राशि स्थिर--घर में, चर--परदेश में, द्विस्वभाव-मार्ग में । शुभ युक्त दृष्ट- तीर्थ में । पाप युक्त दृष्ट-कुत्सित स्थान में क्लेश से मरण । उसमें भी द्रेष्काण वश फाँसी से या दूसरे के मारने से या अपने द्वारा, पानी में डूबने आग में गिरने विष आदि से मरने का विचार करना ।

(९) नवम- भाग्य धर्म आदि का विचार, मार्ग, स्त्री संग ।

(१०) दशम--कमं, राज्य का लाभ, माता पिता से धन मुद्रा, अत्यन्त पुण्य विपय, तीर्थं यात्रा, यज्ञ महादान, आरोग्यता ।

(११) लाभ से--राज्य लाभ, सन्मान आदि से लाभ, प्रत्येक धनों का प्रयोजन, अनाज का भाव, मित्र लड़की, चतुष्पद, राजा धन, वहुत-सी आमदनी की युक्ति, परिवार ।

(१२) व्यय भाव से--शत्रु से दुःख वहुत खर्च,शत्रु को रोकना,पकड़ना, हराना, पीड़ा ।

जन्म लान से वर्ष लान का विचार

  • वर्ष कुण्डली जब बन जाती है तब देखना वर्ष में जन्म की लग्न राशि कहाँ पड़ी है। जैसे यदि जन्म कुण्डली में कुम्भ राशि है और वर्ष कुण्डली में ककं राशि है। तो यह कुम्भ राशि वर्ष कुण्डली में आठतें स्थान में है । तव नीचे बताये अनुसार अष्टम का फल बुरा बताया हे । रट

(१) प्रथम स्थान--यह पुनर्जन्म वर्षे है। शरीर कष्ट या मृत्यु सम्भव है । स्वास्थ्य हानि वाधाऐं चिता आदि । (२) दूसरे सें--इस वर्ष ऐक्सीडेन्ट का भय हो, चिता बीमारी आदि हो । परन्तु सम्पत्ति लाभ के विचार से यह्‌ वर्षे अच्छा होगा धन लाभ के नये जरिये निकळेंगे ।