भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 169

~

फल विचार : १६१

इसी प्रकार शेष दिनों की या इच्छित दिन की दिनप्रवेश कुण्डली पंचांग पर से वना लेनी चाहिए । सूक्ष्म फल वर्ष की अपेक्षा मास से और मास की अपेक्षा दिन प्रवेश से प्रगट होता है ।

अध्याय १८

(वर्षं फल खंड का उत्तराद्ध-फलित भाग)

फल विचार

वर्षं फल में फल के विचार में वर्षेश, मासेश, दिनेश, मुन्था, मुन्थेश,सहम,सहमेश

एवं मैत्री दृष्टि, पंचवर्गी वळ, हं वल, हद्दा आदि का विशेष विचार होता है ।

इनके अतिरिक्त भाव फल, दशाफल,राज योग,राजयोग भंग,भ रिष्ट योग, अरिष्ट

भंग,एवं अन्य कई प्रकार के योग जातक के अनुसार ही विचारणीय है । ज्योतिष

दिक्षा भाग ३ फलित खण्ड में इनका पूरा फल विस्तार पूर्वक दिया है । इसी कारण

यहाँ अरिष्टयोग राजयोग आदि एवं मुद्दा ध्रिशोत्तरी दशा योगिनी दशा आदि का

संक्षिप्त वर्णन दिया गया है ।

आशा है कि पाठक उपरोक्त फलित खण्ड अवश्य देख चुके होंगे। यदि अभी

तक उक्त फलित खण्ड को न देखा हो तो निवेदन करता हू कि उसे अवश्य देखें।

उससे वर्ष प्रवेश, मास प्रवेश या दिन प्रवेश कुण्डली में उक्त फलित खण्ड के सहारे

कई योग खोजने में सहायता मिलेगी जैसे ऊपर से गिरने या चोट लगने या सर्प आदि

के काटने का योग, इसी प्रकार के अनेक योग हैं जो इष्ट कुण्डली में हैं या नहीं

खोजना पड़ेगा । ऐसे अनेक योग फलित खंड में दिये हैं जिन को जानना आवइयक

है । ग्रंथ के विस्तार होने के भय से वे यहाँ नहीं दिये इस आशय से कि पाठक उनको

देख चुक्रे होंगे ।

इन के अतिरिवत नीलकंठी के १६ योग भी यहाँ दिये हैं और उदाहरण देकर

उनको समझाया है । ये योग अधिकतर प्रश्‍न सम्वन्ध में काम आते हैं । परन्तु वर्ष के

फक वर्णन में भी इनका उपयोग हुआ है । इस कारण उनको भी यहाँ दे दिया है

जि्षसे पाठक उनसे अनभिज्ञ न रहें और यहाँ वणित फल को समझ सके ।

वर्ष में किस भाव से क्या विचारना

(१) लग्न से-शरीर वर्ण चिह्न घाव आयु सुख दुःख जाति स्वभाव ।

(२) दवितीय से--पोना चाँदी रत्न धातु आदि सव द्रव्यो की स्थिरता और मित्रों

का विचार । * ११