भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वर्ष फल में भाव फल विचार: १६५

लग्नेश पूर्ण बली हो तो--सुख, आरोग्य, धन छाभ, मनोविनोद ये सब प्राप्त

हों । मध्यवली में सुख धन लाभ आदि प्राप्त हो । हीनवछी--विशेष क्लेश और

(विपत्ति हो ।

वर्ष छग्नेश यदि पाप युक्त हो शुभ युक्त न हो तो विवाद, प्रतारण, कदभन्न भोजन |

जन्म लग्नेश, वर्ष लग्नेश, अष्टमेश, वर्षश मुंथेश ये सभी ग्रह वल युक्‍त हों

६-८-१२ भाव में न हों तो सम्पूर्ण वर्ष शुभ हो सुख यश धन लाभ हो। ये सब

निवल हों ६-३-१२ भाव में हों तो दुःख, भय प्रद हो । इन में शुभ की दृष्टि न

हो तो सम्पूर्ण बर्ष अशुभ रहे ।

लग्न में बुध्--तरुध वर्गेश होकर मुंबा युक्त लग्न में हो तो पठन लेखन आदि

से लाम ।

लग्न में गुर—गुरु वर्षेश होकर पाप ग्रहों से पीडित होकर वर्ष लग्न में हो तो

धन हानि, राजा से भय हो ।

अष्टमेश --पाप युक्त अण्टमेश लग्न में हो और लग्नेश चंद्र युक्त अष्टम में हो

तो उम वपं रोग शोक आदि से शरीर क्षय हो।

पष्ठेश लाभेश--पष्ठेश और लाभेश एक ही होकर लग्न में हो तो उस वर्ष

चाहन और राजा से मान मिले ।

पाप ग्रह्‌-लग्न में पाप ग्रह हों शुम दृष्टि न हो तो बह वर्ष मध्यम होता है

मनुष्यों से विवाद अधिक हो ।

सूर्य -लग्न में कन्या के या सिंह के सूर्य हों और सप्तम या दशम भाव पाप युक्त

हो तो कष्ट हो और स्त्री की मृत्यु हो ।

अष्टमेश --लग्न में अष्टमेश हो और लग्नेश पष्ठ में हो तो उस वपं में मृत्यु हो।

पाप ग्रह--१, २, ७, १२ घर में पाप ग्रह हों शुम दृष्टि न हो तो अंधा हो।

नीच ग्रह--लग्न में नीच का ग्रह हो, लग्नेश सूये से युक्त हो, तृतीयेश वारहवें

हो तो विष का भय हो ।

मंगल--लग्न में पाप युक्त मंगल हो, पंचम में .चंद्र, ऊग्नेश अष्टम हो क्रूर ग्रह

शति का योग या दृष्टि हो तो बिजली से मुत्यु हो ।

शनि चंद्र-लग्न में शनि युक्त चंद्र हो तो स्त्री को कष्ट वात रोग ज्वर इवास

आदि का कष्ट या वंधन हो ।

राइ--ळग्न में राहु, पंचम में शनि अष्टम में चंद्र युक्त लग्नेश हो तो वात रोग

गुल्म आदि रोग से मृत्यु हो ।

अष्ठमेश--लग्न में अष्टमेश हो तो वात कफ रोग से शरीर क्षय हो, मुख कंठ

आदि में रोग हो।

लूग्नेश--लग्नेश नीच का लग्न में हो नीच ग्रह से युक्त हो तो शरीर में रोग

स्त्री पुत्र को कष्ट हो ।