भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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१६६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

शनि--शनि लग्न या अष्टम में हो और वर्षेश भी शनि युक्त अष्टम हो तो सर्पे

स्पश का कष्ट हो ।

सूय-लग्न में उच्च का सूर्य हो, गुरु चतुर्थ और मंगळ दशम हो तो सव राजा

उसके पराक्रम की बड़ाई करें ।

लग्नेश--लग्नेश लग्न में हो कर्कं का वलवान्‌ गुरु चतुर्थ में हो और शुभप्रह

युक्त दृष्ट हो तो बहुत सुख हो ।

शनि, चंद्र->लग्न में शनि युक्‍त चंद्र हो, नवम गुरु और तीसरे शुक्र हो | तो

पराक्रम और कीति लाभ, संताप वृद्धि हो ।

गुरु चंद्र--लग्न में चंद्र युक्त गुरु हो दशम में शुक्र के साथ बुध हो तो उसकी

बुद्धि का सवंत्र प्रकाश हो ।

सौम्य या पाप ग्रह--छग्न में ३ सौम्य ग्रह हों तो अनेक सुख हो ३ पाप ग्रह

हों तो दुःख शोक आदि करते हैं ।

लाभेश पष्ठेश--लाभेश षष्ठेश एक होकर लग्न में हों तो वाहन और राजा से

सन्मान प्राप्त हो ।

यदि कोई भी ग्रह लग्न को न देखे तो पंचाधिकारियो में जो सबसे वली हो

बह वर्षेश होगा पंचवर्गी बल के अनुसार बल का विचार करना ।

अन्य मत है कि वल और दृष्टि में समानता हो और दिन में वर्ष प्रवेश हो तो

सूर्य जिस राशि पर हो उस राशि का स्वामी वर्षश होता है । यदि रात्रि का जन्म है

तो जिस राशि पर चंद्र हो उस राशि का स्वामी वर्षेश होता है । उ

अन्य मत है पाँचों में वल और दृष्टि से पूर्ण कोई न हो तो वर्ष लग्नेश ही

वर्षश होता है ।

किसी का मत है कि ऐसी स्थिति में जिसके स्वग्रृही, उच्च, नवांश, द्रेष्काण,

हुद्दा आदि में बहुत अधिकार हों वह वर्षश होता है ।

किसी का मत है कि इन पाँचों में जिसके ३ या अधिक अधिकार मिलें वह

वर्षेश होगा । इनमें जिनके बळ और दृष्टि अधिक हो वह वर्षश होगा ।

यदि उपरोक्त नियम से चंद्रमा वर्षश होता हो तव भी वह वर्षेश नहीं होगा ।

ऐसी परिस्थिति में यदि वह चंद्र पंचाधिकारियो में से किसी से इत्थशाल करता हो

तो वह इत्थशाल' करने वाला ग्रह वर्षश होगा ।

यदि किसी में चंद्र इत्थशाछ न करता हो तब दिन या रात्रि में वर्ष प्रवेश के

अनुसार सूर्य राशीश या चंद्र राशीश वर्षश होगा जेता कि ऊपर वता चुके हैं । यदि

ऐसी परिस्थिति में चंद्र राशीश स्वयं चंद्रमा हुआ तो वही वर्पेश होगा । इसी कारण वर्षश चन्द्र का वर्णन किया है।

वर्ष प्रवेश के पंचांग का फल

(१) तिथि- वर्षे प्रवेश के समय, नन्दा, भद्रा, जया, पूर्णा तिथि शुम फल प्रद हैं | द्वादशी और रिक्ता तिथि अशुभ हैं ।