सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 176, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१६८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
(६) षष्ठ में--शत्रु का पराजय ।
(७) सप्तम में--स्त्री सुख ।
(८) अष्टम में--मूत्यु तथा रोग भय ।
(९) नवम में-धन और धर्म की प्राप्ति ।
(१०) दशम में--स्थान, धन और सुख की प्राप्ति ।
(११) लाभ में-लाभ, सुख तथा घन का संग्रह ।
(१२) व्यय में--दुःख, दरिद्रता की प्राप्ति ।
संक्षिप्त. ताजिक फल
जन्म लग्न वर्ष लग्न एक हो--वर्ष कष्टदायक ।
वर्ष लग्न से जन्म लग्न ६-८-१२वें हो--वर्ष कष्टदायक ।
जन्म लग्नेश वषं लग्नेश से ६-८-१२ में हो--वर्ष कष्टदायक ।
वर्षे लग्न से छठे स्थान में-सू्य, शुक्र--दाहिने पाँव में शस्त्र भय ।
लग्नेश सूर्य और चंद्र से युक्त--दमा और खाँसी का रोग हो ।
लग्नेश अस्तंगत या लग्नेश चंद्र से दृष्ट--सरदी और खाँसी हो ।
जन्म में अष्टमेश लग्नस्थ हो भौर शुक्र शनि ११ या १२वें भाव में हो--हैजे के
रोग से मृत्यु ।
बली प्रह लक्षण
केन्द्र में ग्रह बलवान होता है । इसमें छग्न में विशेष रूप से बलवान् होता है । १, १०, ७, ४, ११, ५, ९ इनमें पूर्व क्रम से वली होते हैं ।
चन्द्रमा २, ३ स्थान सहित पूर्वोक्त स्थान में रहने से बली होते हैं जैसे २ से
३, ३ से ९, उससे ५ इस क्रम से पहले दिये स्थान से अधिक वली होते हैँ ।
मंगल तृतीय भाव सहित पूर्वोक्त भावों में रहने से पूर्वं कथित अधिक बली
होता है जसे ३ से ९, ५, ११, ४, ७, १०, १ यथा क्रम वली हैं ।
६-८-१२ भाव अशुभ हुँ शेष शुभ हैं। ये अशुभ भाव भी यदि उस भावस्थ
ग्रह के दीप्तांश को अति क्रमण किया हो तो अशुभ नहीं है ।
जो ग्रह जन्म में बली हों परन्तु वर्ष प्रवेश में वलहीन हों तों ग्रह वर्ष के अन्त
में अशुभ अर्थात् वर्ष के प्रथम भाग में शुभ होते हैं। यदि जन्म में हीन बली हों वर्ष में सबळ हों तो वर्ष में पहिले अशुभ फल देते हैं पीछे शुभ फल देते हैं । जन्म और वर्ष में समान बल हों तो सम्पूर्ण वर्ष भर शुभ फल देते हैं । यदि जन्म और वर्ष में निर्वोल हों तो पूरा वर्ष अशुभ होता है । मंगळ--नीच का मंगळ लग्न में पाप युक्त दृष्ट हो तो उस वपं में स्थियों को विशेष कर कष्ट होता है।
सुर्य मंगल सूर्य और मंगल के साथ शुक्र लग्न या व्यय में हो तो नेत्र रोग हो ।
धाप ग्रह कस्न, धन, सप्तम वा व्यय में पाप ग्रह हो शुभ दृष्टि न हो तो अन्ध दोप होगा ।