सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 181, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवर्ष फल में भाव फल विचार : १७३
तृतीयेश--वर्ष का अधिकारी होकर यदि तृतीयेश तृतीय में हो या वर्ष लग्नेश से उससे इत्थशाल योग होता हो तो सहोदर से परस्पर सुख हो! तृतीयेश-सहजेश को पाप ग्रह से इशराफ योग होता हो और सहज भाव में हों तो कलह हो ।
तृतीयेश- सहज स्थानं यदि पाप ग्रह युक्त हो और सहजेश तथा प्रात सहमेदा'
की दृष्टि सहज पर नहीं पड़ती हो तो सहोदर को दुःख होता है ।
इसी प्रकार भ्रातु सहमेश में पाप ग्रह हो, उसपर सहजेश तथा भ्रातृ सहमेश की
दृष्टि नहीं पड़ती हो तो भी सहज को क्लेश होता है ।
तृतीयेश जिस स्थान में हो वहाँ से वर्षेश यदि सप्तम में हो, वर्ष रूग्नेश।, सहजेशः
से सप्तम में हो तो सहोदरों से विवाद हो । और जन्मकाल में सहजेश सहज भाव में: हो वर्ष में भी वेसे ही सहज में हो, शुभ दृष्टि हो तो सहोदरों से सुख हो ।
यदि वर्ष लग्न से सहजेश वर्षेश होकर अस्तंगत हो तो कलह हो ।
अथवा रवि शुक्र में से एक ग्रह सहजेश तथा वर्षश होकर अस्तंगत हो तो कलह।'
अथवा वर्षेश को सहजेश से इसराफ योग होता हो तो शारीरिक क्लेश, अपने.
परिजन और सहोदरों से झगड़ा हो ।
गुरु-हीन वल गुरु तीसरे हो तो भाइयों से विरोध हो ।
शनि-यदि १ या ८ राशि में होकर सहज में हो तो सहज को निश्चय रोग हो ।'
मंगरू-मंजल यदि ३ या ६ राशि में रहकर तीसरे भाव में हो तो सहज को
रोग हो ।
तृतीयेश-तृतीयेश तीसरे में वर्षश युक्त हो और लग्तेश भी हो तो भाइयों से
बहुत सुख हो ।
यदि तृतीयेश या वर्षेद की दृष्टि तृतीय पर न हो, और उसमें पाप ग्रह हो या
तृतीय पाप युक्त हो तो भाइयों से दुःख हो ।
वर्षेश मंगल केतु--वर्षश मंगल और केतु युक्त तीसरे हो तो बहुत कष्ट हो, शत्रु
का भय, वात रोग हो ।
तृतीयेश--तृतीयेश तीसरे घर में या केन्द्र त्रिकोण में हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि
हो तो अग्नि भय हो ।
पाप ग्रह--तीसर छठ पाप ग्रह हो तो वन्धु वर्ग से सुख हो ।
तुतीयेश--तृतीयेश शत्रु गृही हो, शत्रु पति तृतीय में हो तो भ्राता से शस्त्र
द्वारा सिर मे आघात होगा ।
तृतीयेश तृतीय में हो और बुध गुरु यदि शुक्र के साथ हों तो सम्पूर्ण अरिष्ट दूर
हो, यद्यपि सप्तम भाव के हों तो भी जय करते हैं ।
शुक्र--तृतीय में शुक्र, नवम में गुरु, ल्ग्त में चन्द्र और शनि हो तो महान कीति
व धन लाभ हो, ऐश्वर्य बढ़े अरिष्ट नाश हो ।