सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 202, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१९४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
॥ वर्षश-वर्षश दशम में बळी हो और सौम्य ग्रह युक्त हो तो राजा से अर्थ लाभ
हो शरीर सुख हो मन प्रसन्न रहे, वाहन का लाभ हो ।
- ददामेश-दशमेश दशम हो शुभ ग्रहों से युक्त हो लग्नेश केन्द्र में हो तो स्त्री का
सुख राजा पक्ष से लाभ शत्रु का नाश हो अरिष्ट का नाश हो ।
2 ददामेहा-दशमेश दशम हो और धनेश पंचम में हो तो धान्य का लाभ हो शत्रुक्षय हो अरिष्ट का नाश हो ।
, ५ दशमेश-दशमेञ्ष शुभ युक्त २, ३, ४ भाव में हो ओर चतुर्थेश केन्द्र में हो या
दशम में हो तो घोड़े की सवारी या वाहन प्राप्त हो ।
त्रिराशि पति-त्रिराशि पति दशम हो और दशमेश नवम पंचम, हो तों सब
अरिष्ट दूर हों ।
शमेश-दशमेश दशम सौम्य ग्रह युक्त हो लाभेश केन्द्र में हो तो स्त्री सुख, शत्रु
नाश, राजा से लाभ हो
एकादश (लाम). भाव में ग्रह फल
लाभ में-सब पाप या शुभ ग्रह्-धन वृद्धि, यश वृद्धि अच्छे मित्रों का संग, बल पुष्टि हो ।
बलहीन पाप ग्रह-पुत्र, घन, बुद्धि इन का नाश ।
बलहीन शुभ ग्रह-अपने शुभ फल को न्यून करते हैं ।
. लाभ में सूर्य-राजा से धन प्राप्ति, धान्य, वस्त्र, सुवर्णं इनकी प्राप्ति, भोग,सुख,
शंत्रु नाश, आरोग्यता, भाग्योदय, कामना सिद्धि, घोड़ा, बैल आदि से धन प्राप्ति,
पुत्र के शरीर में पीड़ा, शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो पुत्र सुख हो ।
लाभ में चन्द्रमा-व्यापार से लाभ, राजा से सुख, धन लाभ, पुत्र सुख, प्रतिष्ठा
वृद्धि, शत्रु नाश, पुत्र वस्त्र भूषण आदि प्राप्ति, बुद्धि बढ़े, श्वेत वस्तु का लोभ.
- लाभ में मंगल-राजा से सुख, शत्रु नाश, मित्र पक्ष से लाभ, विजय, घोड़ा हाथी
सुवणे वस्त्र की प्राप्ति, स्त्री, पुत्र, भाई का सुख, सम्पत्ति का आगमन । ०
लाभ में बुध-विजय सम्पत्ति, धान्य वस्त्र इनकी वृद्धि, कीति, मनोरथ सिद्धि,
पशुओं की वृद्धि, आरोग्यता, सुख, द्रव्य का छाभ, भाग्योदय ।
लाभ में गुरु-जय, हाथी घोड़ा आदि वाहन लाभ, शत्रु नाश, पुत्रोत्सव, प्रतिष्ठा वृद्धि, आरोग्यता, स्त्री पुत्र भाई का सुख ।
: लाभ में शुक्र-विजय, पुत्रों की वृद्धि, राज पक्ष से जय, शत्रु नाश, मित्रों की
वृद्धि, सुवर्ण लाभ जल मागं से धन प्राप्ति, ऐश्वर्य वृद्धि, सुख, व्यापार से लाभ ।
लाभ में शनि-सुवर्ण गो भूमि वाहन अदव आदि लाभ, कीति वृद्धि,स्त्री से सुख,
आरोग्यता, चित्त प्रसन्न, धेयं वृद्धि, संतान को पीड़ा ।
: लाभ में राहु-राजा तुल्य हो, शत्रु नाश, आरोग्यता, ऐश्वर्य, स्त्री सुख, नीचजन
से लाभ, सुवर्णे गो भूमि धन की वृद्धि, पुत्र को भय ।
. लाभमें केतु-राजा के समान करे, शत्रु नाश, सुवर्ण गो भूमि तथा धन का लाभ, पुत्र भय ।