सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 204, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें१९६ 3 सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
व्यय में केतु-शत्रु से भय, स्त्री को पीड़ा, मनुष्यों से विवाद विकलता, कान,
नेत्र, उदर में पीड़ा ।
व्यय में सूयं-यदि सूर्य वर्षेश होकर वर्ष में पाप युक्त या दृष्ट होकर छठे घर में
चतुष्पद राशि ( १, २, ५, ९ उत्तराद्धे, १० पूर्वार्ध राशि ) में हो या ८-१२ स्थान में
हो तो नौकरों से कलह हो ।
व्यय में बुघ-वर्षेश बुध पाप युक्त होकर ६, ८, १२ घर में हो तो नीच कर्म
करता है । यदि यह वर्षश बुध पाप ग्रह से दृष्ट हो तो लाभ नहीं होता ।
यदि यह वर्षश बुध अस्तंगत हो तो लेखन कर्म से लाभ नहीं होता ।
व्यय में शनि-यंदि बली झनि वर्षश होकर ६-१२ घर में हो तो नई जमीन में
बसे, वृक्ष लगावे, जलाशय आदि का निर्माण करे ।
व्यय में वर्षश-वर्षेश तथा लग्नेश बलहीन होकर ६-८-१२ स्थान में चतुष्पद
आदि जैसी राशि में हो तो उसके सदुश फल देते हैं। जैसे चतुष्पद राशि में हो तो
चोपायों का नाश करते हैं। द्विपद से आश्रित मनुष्यों का नाश, जलचर राशि से
जल जीवों का नाश आदि ।
वर्षेश लग्न से ६-८-१२ में हो और जन्म और वषं में भी दशमेश बलहीन हो तो
शुभ नहीं होता ।
या वर्ष में अष्टमेश बलहीन होकर ६-८-१२ घर में हो तो शुम नहीं होता ।
व्यय में शुक़्-यदि बलहीन शुक्र छठे स्थान में पाप युक्त या दृष्ट हो और नर.
राशि में हो तो सेवकों की हानि हो यदि वह चतुष्पद राशि में हों तो चोपायों की
हानि करता है ।
ऐसा ही वर्षेश का ८-१२ स्थानगत होने का फळ है।
व्यय में चंद्र मंगू-यदि चन्द्र युक्त मंगळ पाप ग्रहों से युक्त होकर १२ भाव में
हो तो चोपायों में व्याकुलता होती है।
मंगल वर्ष में व्यय भाव में हो सूर्य दुसरे घर में हो तो विवाद में क्लेश हो ।
व्यय में पंचमेश-पंचमेश व्यय में हो व्ययेश की दृष्टि पंचम पर हो तो धन व्यय
हो पुत्रों को पीड़ा हो, कन्या हो । .
व्यय में व्ययेश छग्नेश-व्ययेश लग्नेश वारहवे में पाप ग्रह युक्त हों तो खर्चे बढ़े
दंड से पीड़ा हो ।
व्यय में शति-वलवान शनि व्यय में सौम्य ग्रह युक्त या दुष्ट हो तो सुख हो,
कष्ट नाश हो ।
व्यय में गुरु शनि स्र्य-बारहर्वे गुरु सूर्य और शनि हो तो उस वर्ष में अधिक
खचं हो, स्वजनों से बैर और परजनों को सुख देवे ।
व्यय में अष्टमेश-अष्टमेश वारहवें हो और शनि क्रूर ग्रह से युक्त दृष्ट हो तो
उस वर्ष में अपने वर्ग से शरीर को कष्ट हो ।
व्यय में सप्तमेश शनि-व्यय में शनि युक्त सप्तमेश हो तो उस वर्ष कलत्र को
पीड़ा, लोकापवाद, स्वजनों से बैर, मन में व्याकुलता, संतान पीड़ा हो ।,