भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 207

वर्षफल में भाव फल विचार : १९९

(३१) सूयं शनि मंगल ८ या १० में हों तो वाहन से चोट लगने की घटना हो ।

(३२) जन्म में सूर्य मेष या सिंह राशि का हो तथा वर्ष में बलवान होकर दशमं

हो तो पदोन्नति हो ।

(३३) जन्म का मंगल जिस राशि का हो, वर्ष में यदि चंद्र उसी राशि में हो तो धन लाभ एवं पदोन्नति हो ।

(३४) लाभेश लग्नेश का परस्पर इत्थशाळ हो तो उस वर्ष यश और सम्मान मिले कीति बढे ।

(३) वर्ष कुंडली में चंद्र लग्न में या ६-८-१२ घर में हो और सूर्य की दृष्टि

हो तो शत्रु भय । मंगल की दृष्टि-शस्त्र भय । शनि दृष्टि-रोग भय । बुध गुरु शुक्र

की दृष्टि हो तो लाभ हो, परन्तु रोग भी हो ।

(३६) ३-६-११ भाव में शनि, मंगल, राहु या सूर्य हो तथा चंद्र, गुरु, शुक्र,

केन्द्र या त्रिकोण में हों तो धन सुख सम्पत्ति आरोग्यता लाभ हो।

(३७) वर्ष में ३-१०-११ भाव में बली मंगल हो तो उस वर्षे भाई द्वारा यहां

एवं सुख सम्पत्ति प्राप्त हो ।

(३८) पाप युक्त शुक्र २ या १२ भाव में हो तो उस वषं नेत्र पीड़ा या नेत्रों की

शल्य क्रिया होने का योग होता है ।

(३९) वर्ष में मंगल चंद्र का दृष्टि आदि द्वारा सम्बन्ध हो या तृतीयेश से

इत्थशाल हो तो भ्रातु सुख में अल्पता हो ।

(४०) वर्ष लग्नेश पर ८ या १२ के स्वामी की दृष्टि हो तो वर्षभर दुःख और कष्ट भोगे ।

(४१) जन्म का धनेश वषे में पूर्ण वली हो या शुभ स्थान में हो तथा उसका सम्बन्ध वर्ष में धनेश से हो तो उस वर्ष आथिक लाभ हो, धन वढे । (४२) यदि मिवंल धनेश भाग्य भाव में हो तो संचित धन का नाश हो । (४३) धनेश भाग्येश बलवान होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो तो उस वर्ष आथिक लाभ हो ।

(>) घनेश मंगल व्यय भाव में हो तो भूमि सम्बन्धी कार्यों में संचित पूँजी खच हो ।

(४५) धनेश चंद्र व्यय में-मांगलिक कार्ये में खच हो। |

(४६) धनेश बुध या शुक्र व्यय में-उपरोक्त फळ । |

(४७) धन भाव में गुरु हो और शुम ग्रहों से दृष्ट हो तो उस वर्ष धन प्राप्त

करने में सहायक हो ।

(४८) धनेश पर बुध, गुरु, शुक्र की पूर्ण दृष्टि हो तो उस वर्ष धन प्राप्त हो ।

(४९) धनेश वर्षेश का परस्पर इत्यशाल हो तो अचानक धन प्राप्त हो ।

(५०) बली धनेश कहीं हो लाभ करायेगा ।

(५१) घनेश चतुर्थेश का सम्बन्ध हो तो वाहन खरीदने या बेचने से लाभ हो ।

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४ · पृष्ठ 207, कुल 280 में से · BharatKosha