सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 208, कुल 280 में से
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२०० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वर्षफल खण्ड
(४२) चतुर्थेश की दृष्टि चतुर्थ पर हो तथा गुरु केन्द्र में हो तो उस वर्ष लाभ
हो अच्छा सम्वाद सुने ।
(५३) चतुर्थं में मंगल-माता का सुख न्यून हो ।
(५४) चंद्र वर्ष में ४-१० भाव में हो तो वह वषे लाभप्रद हो ।
(५५) जन्म में गुरु जिस राशि में हो वह राशि वर्ष में, पंचम भाव में हो उसमें
गुरु हो या उस पर वर्षेश या पंचमेश की दृष्टि हो तो उस वर्ष सन्तान लाभ हो । (५६) पंचम भाव में सूये शनि हो तो सन्तान कष्ट व दुर्घटना से दु.ख हो
(५७) पंचम में मंगल और शुक्र दोनों हों तो सन्तान का योग है ।
(५८) पंचम में बलवान गुरु चंद्र हो तो सन्तान का योग है ।
(५९) छठे भाव में पापग्रह हो तो आरोग्यता हो ।
(६०) छठे भाव में षष्ठेश हो तो स्त्री प्राप्ति में सहायक हो ।
(६१) जन्म में मंगल षष्ठेश हो तथा वर्ष में वह षष्ठ भाव में हो तो रक्त दोष
से रोग हो !
(६२) सप्तम में शुक्र हो उस पर मंगल की दृष्टि हो तो सन्तान हो ।
(६३) सप्तम पर पाप ग्रहों को दृष्टि हो तो उस वर्ष स्त्री रोगी हो या कष्ट भोगे ।
(६४) जन्म का सप्तमेश यदि वर्ष में मुंथेश या वर्षेश हो तो सुख प्राप्त हो ।
(६५) जन्म का अष्टमेश वर्ष में लग्न में हो या लग्नेश हो तो अनेक वाधा एवं
कठिनाइयाँ हों ।
(६६) वली अष्टमेश केन्द्र में हो या वर्ष लग्नेश अष्टम हों तो वह वर्ष अनिष्ट
कारक हो ।
(६८) अष्टम में सूर्य, बुध, मंगल धन-नाशकारी हैं ।
(६८) अष्टम भाव में चंद्र मंगल की युति कष्ट कारक है ।
(६९) जन्म का अष्टमेश शनि वर्ष में अष्टम भाव में होकर लग्न से इत्थशाल
करे तो उस वर्ष मृत्यु संभव हो ।
(७०) अष्टमे त्रिकोण या केन्द्र में हो तो उस वर्ष घातक दुर्घटना हो ।
(७१) नवम भाव में लग्नेश नवमेश वक्री हो और शनि या चंद्र अष्टम हो तो
वर्ष अनिष्ट कारक हो ।
(७२) शनि दशम हो तो धन हानि करे।
(७३) दशमेश अष्टमेश का सम्बन्ध हो तो स्थानांतर या राज्य पद की हानि करे।
(७४) जन्म में शनि जिस राशि में हो वह राशि वर्ष में दशम हो और मंगल
दशम हो तो जातक राज्य दंड प्राप्त करे या पदच्युति हो । (७५) छाभ भाव में कोई बली ग्रह हो तो उस ग्रह की दशा में घन लाभ हो ।