भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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अध्याय २०

वषश फल विचार

वर्षेश--६-८-१२ भाव को छोड़कर अन्य भाव में हो तो धन, सुख और राज्य

के सुख आदि देता है। पूर्णवली का पूर्ण फल मध्य वली का मध्यम फल और हीन

'बली हो तो भय, शोक, दुःख, रोग आदि होते हैं ।

वर्षेश उपरोक्त स्थान के अतिरिक्त अन्य स्थान में हो र दित हो वर्ष और जन्म

में वल पाया हो तो अच्छा फल सुख, निरोगता लाभ आदि देता है।

वर्षेश ६-८-१२ भाव में हो या पाप ग्रह से युक्त दृष्ट हो तो अरिष्ट क्लेश

आदि करता है। शुभ फल नहीं देता ।

यदि केन्द्र में शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो सुख और लाभदायक होता है।

जो ग्रह वर्षेश होता है वह वर्ष भर दशापति रहता है, उसकी दशा का फळ

चष भर रहता है । इसलिए वर्षश का वल जन्म काल एवं वपं में भी विचारना ।

दोनों में पूर्ण बली-पूर्ण शुभ फल, दोनों में मध्य वली-मध्यम फल, दोनों में हीन

बली-अधम फल । जन्म में पूर्ण बल वपं में मध्यम बल-मध्यम फल । जन्म में पूर्ण

बल वपं में हीन वल-उस से कम फल होगा। इसी प्रकार दोनों का बल विचार कर

फल का अनुमान करना ।

वर्षेश का जिस ग्रह से इत्थशाल हो वह अपनी प्रकृति के अनुसार शुभ फल

देता है । शुभ ग्रह से इसराफ हो तो शुभ फल कुछ कम देता है । पाप ग्रह के

इत्यशाल से अशुभ फल होता है ।

जन्म वर्षे में जो ग्रह जैसी हुद्दा में होकर दुसरे का तेज ग्रहण कर्ता हो वपं में

“भी उसी प्रकार हुद्दा में हो तो अपना फल अपने सम्बन्धी ग्रह को दे देता है अर्थात्‌

जन्म में जिस हद्दा में ग्रह है उसी हद्दा में जो कोई ग्रह हो उसके साथ मुथशिली

होतो जन्म के उस ग्रह का तेज ले लेता है।

जो ग्रह जन्म में शुभ या अशुभ फल देने में समर्थ है वह वर्ष लग्नेश या वपंश

क्के साथ मूसदिक योग करता हो तो जन्म कालोक्त फल वर्ष में नहीं होता जो इन के

साथ इशराफ योग न हो तो उस ग्रह का जन्म कालिक फल वर्ष में होता है। यदि

-लग्नेश वर्पेश इन दोनों में किसी से इत्यशाळ करता हो तो विशेष रूप से फल

कहना । यदि उस ग्रह को वर्षेश या वषं लग्नेश से न तो इशराफ हो और न इत्यशाल

हो तो भी जन्म का फल होगा ।

यदि जन्म में पंचमेश पुत्र भाव को देखता हो या पुत्र भाव में हो तो अपनी

दशा में पुत्र देने में समर्थ होता है यदि यही जन्म का पुत्र भावेश वर्ष लग्नेश या

वर्षेश से या पंचमेश से मुसरिफ योग करे तो वर्ष में अवश्य पुत्र नाश करेगा ।