सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 210, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें२०२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
वर्षश गुरु हो और जन्म में गुरु से चन्द्रमा इत्यशाल करता हो परन्तु गुरु अपनी
हद्दा में हो और वर्ष में चन्द्र को देखे तो जन्म में चन्द्रमा गुरु को तेज देने से वह.
वर्ष शुभ फल देगा ।
इसी प्रकार जन्म का और वर्ष का शुभाशुभ फल योग कारक ग्रहों के वलछाबल:
विचार और इत्यशाल कम्बुल इसराफ इन योगों का विचार कर कहना ।
वषश केन्द्र या त्रिकोण में सौम्य ग्रह युक्त हो तो सम्पूर्ण वर्ष शुभ हो धन धान्यः
लाभ हो यश बढ़े शत्रु नाश हो । : वर्षेश वर्षलग्नेश और जन्मलग्नेश ये तीनों वर्ष कुण्डली में अष्टम हों तो मृत्यू,
या मृत्यु तुल्य कष्ट हो ।
वर्षेश वली हो और ऊऱ्नेश एवं गुरु की दृष्टि धन भाव पर हो साथ ही लाभेशः
ओर धनेश की युति हो तो बिना प्रयत्न के लाटरी आदि से धन मिले ।
वर्षश षष्ठ में वक्री मंगल-रक्त विकार । शुक्र-वात रोग । चंद्र-उदर या हृदय.
रोग । सूर्य-ज्वर पीडा हो । ॥
वर्षेश निर्बल हो तथा धनेश और भाग्येश अपनी-अपनी नीच राशि में हों तो:
वह वर्ष अनिष्ट दायक हो ।
वर्षेश बली सप्तम में हो तो विवाह हो या पत्नी सुख हो ।
वर्षेश गुरु पाप दृष्ट अष्टम हो तो झूठा कलंक लगे ।
वर्षेश मगल त्रिकोण में हो तो शस्त्र भय । केन्द्र में लग्नेश अष्टमेश की युति
हो उस पर मंगल की दृष्टि हो तो मृत्यु हो ।
वर्षेश लग्नेश दोनों निवे हों तो अनिष्ट हो, श्रम व्यर्थ हो ।
वर्षेश बुध ६-८-१२ में हो पाप ग्रह से दृष्ट हो तो उस वर्ष नीच कमं हो ।
वर्षश बली शनि ६ या १२ घर में हो तो पुराना घर लेने या बेचने से लाभ हो ॥'
वर्षेद शनि स्वग्रही या उच्च का दशम में हो तो धन प्राप्त हो ।
वषश सुयं-राज्योप्न ति, चन्द्र-शवेत वस्तु के व्यापार से लाभ । मंगल-सम्मान ।: बुध-व्यापार में उन्नति | गुरु-परीक्षा में सफलता । शुक्र-धन प्राप्ति हो । बळी वर्षश जिस भाव में हो उस भाव की वृद्धि हो ।
प्रत्येक वर्षश ग्रह का फल विचार
वर्षेश विचार करते समय ध्यान रहे कि उस ग्रह का बल जन्म में और वर्ष में:
क्या है। ग्रह का ५ विश्वा से कम बल हो तो वह हीन बली, ५ से १० तक मध्य वली और १० से अधिक हो तो ग्रह पूर्ण बली समझना । यदि जन्म और वर्ष में पुर्ण बली हो तो पूरा फल होता है एक में पूर्ण बली दूधरे में मध्य बली हो तो पूरा शुभ फल कुछ कम हो जाता है, एक में पूर्ण दूसरे में हीन तो मध्यम फळ, दोनों में मध्यः बली-मध्यम फल, एक में मध्यम दूसरे में हीन वल-न्यून शुभ, दोनों हीन बल-शुभ' फल न्युन, अशुभ फल विशेष । जैसे-जैसे शुभ की मात्रा घटेगी, अशुभ फल की मात्राः बढ़ेगी । इसी प्रकार यहाँ बताये वर्षेश के फल पर विचार करना ।