सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 211, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंवर्षेश फल विचार : २०३४
(१) वर्षश सुर्य पूर्ण वली-राज्य, सुख, पुत्र, कुलोचित धन लाभ, कुल के अनुसार प्रतिष्ठा, -
परिवार में सुख, शत्रु नाश, भुमि, घन कीति, मित्र लाभ हो। ये सव पूर्णं बकी सूर्य:
के फल होते हैं ।
मध्यम बली-उपरोक्त सव सुख मध्यम होता है, थोड़ा सुख, स्वजनों से विवाद, .
स्थान का छूट जाना, देह में कृशता, कष्ट, राजा से भय । यदि शुभ ग्रह॒ से वर्षेश का.
इत्थशाल न हो तव उपरोक्त फल होता है । यदि मध्यवली ग्रह शुभ ग्रह से इत्यशाळः
करे तो शुभ फल होता है।
हीन बली-परदेश में यात्रा, धन नाश, रोग, शोक, शत्रु भय, आलस्य, लोक:
अपवाद (कलंक) क्लेश, पुत्र और मित्र से भय, पिता आदि से भी सुख नहीं मिलता
(२) वर्षे चन्द्र
पूर्णं वली-धन, स्त्री, पुत्र, घर का अनेक सुख, माला, सुगंधित द्रव्य, मोती, .
वस्त्र से सुख हो, कुलोचित पदवी या अधिकार लाभ हो, राजाओं से मित्रता हो
शरीर पुष्ट हो ।
चन्द्र वर्षश होकर किसी ग्रह से इत्थशाल करे तो वह वर्षश होता है । यदि वर्षेशचंद्र से कबुल करत है और रात का जन्म है तो वह वर्ष उत्तम होता है ।
मध्यवली-उपरोक्त फल साधारण, पुत्र मित्र वर्ग से शत्रुता, दूसरे स्थान में”
जाना पड़े, शरीर में दुर्वंछता हो । मध्य बली चंद्र होकर पाप ग्रह से इशराफ करता”
हो तो कफ का प्रकोप होता है।
हीन बली-या अस्तंगत हो तो शीत कफ यक्ष्मा खाँसी रोग हो, चोरी का डर.
स्वजनों से विरोध ।
अति हीन बळ हो तो पुत्र स्त्री का सुख नष्ट हो दूर देश जाना पड़े, मृत्यु तुल्य -
कष्ट हो।
(३) वर्षश मङ्गल
पूर्ण बली-कीति जय, शत्रु का नाश, संग्राम में प्रधान या सेनापति, कुलोचित.
धन सम्पत्ति की प्राप्ति, मित्र स्त्री पुत्र का सुख, छोगों में पूज्य, राजा से धन प्राप्त हो।' -
मध्यवली-उपरोक्त से साधारण फल, चोर भय, राजा आदि से भय। गाड़ी:
या शस्त्र से चोट या घाव, शरीर से रुधिर निकले, अधिक क्रोध, झगड़ा, रोग, .
विवाद, विरोध, धन क्षय; बल, गौरव आदि का मध्यम सुख हो । र
हीन बली-शत्रु, चोर, अग्नि, इन से भय, कलंक लगने का भय, बुद्धि नावा,..
काम-काज में वाधा, अग्नि रोग भय, परदेश गमन, स्त्री, पुत्र, मित्र से क्लेश, चरण; .
मुख, और नेत्र में रोग, दुष्ट एवं स्वजनों से भय यदि गुरु की दृष्टि न हो तो क्षय:
रोग का भी भय होता है ।
(४) वर्षश बुध टु
पूर्ण बली-धन लाभ नाना प्रकार की कलाओं में गणित या ज्योतिषशास्त्र में...