भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२२०४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

“बैद्यक में ज्ञान की उन्नति हो विवाद में जय, लेखन में, अच्छे शास्त्र पढ़ने में, या

` “लिखा पढ़ी के काम में प्रतिष्ठा या धन लाभ हो, राजा के आश्रय से गौरव प्राप्त हो,

“राजाका मंत्री होवे ।

मध्य वली-पूर्वोक्त फल साधारण होगा । रास्ता चलना व्यापार में लाभ पुत्र

-व मित्र से सुख । यदि शुभ ग्रह से इत्यशाल हो तो यह फल होता है अन्यथा अच्छा

'फल नहीं होता ।

बल हीन-वल बुद्धि की हानि, धर्म का नाश अर्थात्‌ अधर्म का उदय, अपने ही

“वचन के दोष से अनादर, झूठी गवाही देनी पड़े, दूसरों के व्यवहार से पुत्र, धन,

मित्र की हानि होती है चित्त में विक्षेप होने से आपत्ति, राजा, शत्रु या चोर से भय,

नेत्र, हृदय, गले में रोग ।

,(५) वर्षश गुरु

पूर्ण बली-परिवार में सुख, धर्म गुण-ग्राहकता. धन कीति पुत्र का सुख हो, जगत

“में विश्वास बढे, श्रेष्ठ बुद्धि हो, पराक्रम बढ़े, गड़े हुए धन का लाभ, राजा से गौरव

“बढे, शत्रु नाश हो ।

मध्यबली-पूर्वोकत फल साधारण हो, राजा से मिलाप, विज्ञान शास्त्र में प्रीति।

यदि पाप ग्रह से इसराफ योग होता हो तो दरिद्रता हो धन का नाश स्त्री को कष्ट

“ये अशुभ फल हों । हीन बल-धन, अर्थ और सुख की हानि, पुत्र स्त्री मित्र भी उसे छोड़ देवें, कलंक लगने का भय, व्याकुलता, कष्ट से निर्वाह, शरीर में कफ खाँसी दमा शत्रु से “भय, कलह भी हो । A

-(६) वर्षश शुक्र पुणं बली-शरीर निरोग, अनेक भोग विलास, अच्छे शास्त्र के पढ्ने में प्रेम,

“अनेक रत्नों का लाभ, मिष्ठान्न भोजन, सन्तोष एवं कल्याण प्रताप बढ़े, जय प्राप्त

  • हो, स्त्री के साथ सुख हास्य, राजा से धन लाभ और सुख।

मध्य बली-उपरोक्त फल मध्यम होता है । आजीविका कम, गुप्त दुःख, बंधी हुई जीविका, पाप ग्रह या शरु ग्रह से युक्त दुष्ट हो तो अनेक प्रकार की विपत्ति हो, “धन नाश हो ।

बल हीन-मन में संताप, लोगों में हंसी होती है, विपत्ति हो अपनी आजीविका - नाश हो, स्त्री पुत्र मित्रों से विरोध, कष्ट से भोजन प्राप्ति, कार्य में असफलता, सुख

  • नहीं मिले ।

. (७) वर्षद शनि

पूर्ण बली-नवीन भूमि घर खेत आदि का लाभ, म्लेच्छ राजा से धन समूह का “लाभ, बगीचा लगाना व जलाशय का सुख, शरीर पुष्टि, कुलोचित पद की प्राप्ति ~गुणियों में अग्रगण्य ।

मध्य बळी-उपरोक्त फल मध्यम, कष्ट से भोजन मिले, नौकर उँट भँ पालने