भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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मासेश ओर दिनेश का फल : २०५.

वाले व अन्य के संसर्ग में आसक्त रहे, लाभ हो । पाप ग्रहों से युक्‍त या दुष्ट होने से

अशुभ फल हो ।

हीन बल्ली-कार्यों में असफलता, धन व्यय, विपत्ति शत्रु का भय, स्त्री पुत्र भित्रजनो '

से बेर, खराव अन्न का भोजन । शुभ ग्रह से इत्थशाल हो तो थोड़ा सुख भी मिले ।.

छे

अध्याय २१

मासेश ओर दिनेश का फल

मासेश और दिनेश का फल वर्षेश के समान होता है। परन्तु यहाँ मासेश का

फल संक्षेप से दिया है । प ८

(१) सूये मासेश-राजा से धन की प्राप्ति, मन में हषं, महत्व की वृद्धि निरंतर:

देशान्तरो में यश का प्रचार ।

(२) चंद्र मासेश-इवेत वस्त्रों का लाभ, मोती के हार की प्राप्ति, धनागम, .

राजा से एवं आत्मीय जनों से सुख, तीथं यात्रा आदि शुभ फल हो ।

(३) मंगल मासेश-संग्राम में विजय, रक्त वस्तु एवं धन की प्राप्ति, घर में”

सर्वत्र मंगल ।

(४) मासेश बुध-राजा से धन का लाभ, सुन्दर वस्त्रों का लाभ, कीति बढ़ें, .

अनेक भोग विलास से सुख ।

(५) मासेश गुरु श्रेष्ठ बुद्धि हो, लोक में आदर, देव कार्य में मन ।

(६) मासेञ्च शुक्र-जल क्रीड़ा में प्रसन्नता, काम क्रीडा में अधिक मन, कुटुम्बियों '

से आदर प्राप्त ।

(७) मासेश्च शनि-राजा से मान प्राप्ति, हास्य विलास, घमंड दुर करने में समर्थ ।

उपरोक्त फळ के विचार में इन का बल एवं पाप शुभ दृष्टि आदि पर विचार:

कर फल निर्णय करना ।

साव अनुसार सासेश का फल

(१) लग्न में मासेश-राजा से मान प्राप्ति, सन्तान सुख, धन का राभ;

भाग्योदय, वाहुवल का प्रताप, शत्रु का नाश ।

(२) द्वितीय में मासेश-हुषं, घन लाभ, वाहुबळ का प्रताप, वाहून घर आदि की

प्राप्ति, यदि शुभ युक्त या दृष्ट हो तो ये सव शुभ फल होते हैं ।

(३) तृतीय में मासेश-स्वतः के पराक्रम द्वारा सिद्धि प्राप्त करे, भाई के शरीर

में सुख हो । पाप युक्त या दुष्ट होने से ऐसा फल नहीं करता GE

(४) चतुर्थं में मासेश-शुभ युक्त या दुष्ट हो तो वाहन एव सुवर्ण का छाभ,.

सत संग, ब्राह्मण और देव में भवित ।