भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२०८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

धन में मंगल-राजा, अग्नि चोर से भय, कष्ट शोक क्रूरता, धन का खच !'

घन में बुध-इष्ट मित्रों से सुख, शरीर सुख, धन का लाभ |

घन में गुरु-राज्य .से मौन, शरीर सुख, मित्रों से सुख, धन का लाभ।

घन में शुक्र-मितरों की वुद्धि, शत्रु नाश, स्त्री सुख, घन लाभ।

धन में रानि-धन नाश, राजा से भय, मुख नेत्र में पीड़ा, स्त्री पुत्रादि को कष्ट ॥

घन में राहु-धन नाश, चिन्ता, देह में रोग, गुदा मुख व नेत्र में पीड़ा ।

` घन में केतु-घन धान्य का नाश, कुटुम्ब से विरोध, मुख में रोग, धन की

चिन्ता, घर में सुख नहीं मिले ।

मास प्रवेश में तीसरे भाव में सूयं-धन सम्पदा की वृद्धि) रोग नाश, धमं कीः

वृद्धि स्त्री पुत्र मित्र का सुख । ०

तीसरे भाव में चंद्र-पराक्रम से सुख, मित्र व भाई से सुख, पूर्ण चंद्र हो तों

आरोग्यता हो । ०

तीसरे भाव में मंगल-मित्र और धन का लाभ, राजा से मान, शत्रु नाश, पदः

प्राप्ति, उत्सव ।

तीसरे भाव में बुध-शात्रु मित्र का मिलाप, दुःख और सुख लाभ हो खर्च भी हो,.

मिथ्या बचन बोले । `

तीसरा गुरु-राजा से मान, धन लाभ, मित्र और भाई का लाभ, अल्प सुख,

स्त्री को सुख । द

तीसरा शुक्र-धन का खर्च, अपने मनुष्यों से विवाद, अल्प सुख, भाई बहनों

का पोषण । र ) प

तीसरा दानि-धन लाभ, राजा से मान दुःख की निवृत्ति)

तीसरा रांहु-दात्रु नाश, धन लाभ, आरोग्यता, मित्र सुख, ऐश्वर्य की वृद्धि,.'

बन्धु कष्ट ।

तीसरा केतु-विवाद, बन्धु नाश, वाहु पीडा, दानधर्म से हीन, शत्रु नाश, पराक्रम

की वृद्धि, ऐश्वर्य युक्त ।

मास प्रवेश में चतुर्थ सूर्य-राजा से भय, पशु और.सनुष्य की पीड़ा, मित्रों से.

लड़ाई, भोजन में कष्ट । द

चतुर्थ चंद्र-राजसी भोजन, अल्पधन का लाभ, गौ आदि का लाभ, भाई स्त्री

_ और मित्र का सुख ।

, चतुर्थ मंगल-राज भय, कुटुम्ब से कलह, शरीर कष्ट, विदेश यात्रा, क्षुधइ से

महान कष्ट ।

चतुर्थ बुध-राज मान, मित्र भाई ओर स्त्री का सुख, मित्र का समागम,

शिल्प ज्ञान । द र ८

चतुर्थ गुरु-राजा से. मान, धन लाभ, स्त्री पुत्र मित्र का सुख, भूमि वाहन,

विद्या से सुख ।