सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 218, कुल 280 में से
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२१० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
सप्तम शुक्र-स्त्री पुत्र का सूख, हर्ष, मार्ग में लाभ, व्यापार से धन लाभ ।
सप्तम शनि-धन नाश, शत्रु भय, विदेश यात्रा गमन से भय, मित्र को कष्ट ।
सप्तम राहु-स्त्री को कष्ट, बात रोग कटि व गुदा में पीड़ा देह पीड़ा,
विदेश वास । ;
सप्तम केतु-स्त्री को पीड़ा, मागे में निवृत्ति, देह पीड़ा, व्यय से चिता, केन्द्र में
होने से लाभ । -
मास प्रवेश में अष्टमं सूर्य-पित्त रोग, गुदा में रोग, शरीर पीड़ा, धन हानि,
राज भय । र
अष्टम चंद्र-कफ आदि से रोग, धन नाश, संताप ।
अष्टम मंगछ-गुदा में रोग, रक्त पित्त रोग, धन धर्म, मित्र पक्ष से आपत्ति ।
अष्टम वुध-शत्रु नाश, राजा से मान सुख, धन लाभ ।
अष्टम गुरु-ऋलह, रोग, धन खर्चे, वियोग, विदेश यात्रा ।
अष्टम शुक्र-विदेश यात्रा, धर्मे नाश, शरीर रोग, स्त्री पुत्र को पीड़ा, अल्प लाभ।
अष्टम शनि-शरीर में रोग, धन हानि, व्यसन, स्त्री-पुत्र को पीड़ा, वात रोग।
अष्टम राहु-पेट में रोग, विदेश वास, धन खर्च, . स्त्रो को कष्ट, भाइयों में
विरोध, विनाश । र पु
अष्टम केतु-३, ४, ६, राशि का हो तो वात.रोग से व्याकुल, गुदा में पीड़ा,
१-२ राशि का हो तो पुत्र व धत लाभ । ६ १
मास प्रवेश में नवम सूर्य-मन में उद्वेग, स्त्री-पुत्र से कलह, धम हानि ।
नवम चंद्र-राजा से मान, धर्म में रुचि, शत्रु विजय, भोग आदि की प्राप्ति,
यश बढ़े ।
नवम मंगल-धन का व्यय, कलह, धर्म हानि, पाप बुद्धि ।
नवम बुध-शरीर सुख, धर्म में बुद्धि, धर्म में मिथ्यापना, स्त्री-पुत्र का सुख ।
नवम गुरु-धर्म में रुचि, राजा से सुख, धन लाभ, अनेक भोग प्राप्ति ।
नवम शुक्र-धन लाभ, आरोग्यता, उत्तम वुद्धि, स्त्री पुत्र का सुख, अचानक
घन-धान्य धर्म प्राप्ति । नवम शनि-पाप बुद्धि, राजभय, स्त्री-पुत्र को कष्ट, धर्म हानि ।
नवम राहु-धर्म कार्य में विलम्ब, शरीर में पीड़ा, बेर, राजभय, दीनता ।
नवम केंतु-धर्म-हानि, धर्मे कार्य में कभी घटा बढ़ी हो, भुजा में रोग, म्लेच्छ से
भाग्य की वृद्धि, भाई को पीड़ा ।
मास प्रवेश में दशम सूर्य-धन लाभ, भाग्योदय, कीति सुख, पद प्राप्ति ।
दशम में च£-राजा से मान, हषं, छत्रु नाश, स्त्री पुत्र का सुख, लाभ, सुख, `
पद प्राप्ति ।
दशम में मंगल--राजा की प्रसन्नता, व्यापार से धन लाभ, ऐश्वर्य की वृद्धि ।
दशम में बुध--राजा से मान, शत्रु नाश, धन लाभ, व्यापार में वृद्धि ।