सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमासेश और दिनेश का फल : २११
दम में गुरु--धन लाभ, राजा से मान, कीति, घर में उत्सव, मित्र सुख । दशम में शुक्र--कार्य सिद्धि, धन लाभ, राजा से मान, शत्रु नाश, मित्र सुख । दशम में शनि--राजा से भय, दीनता, धन-हानि, व्यापार में हानि, यात्रा 1 दशम में राहु--धन हानि, मित्रों से बैर, भय, देह में रोग, भुमि की हानि । दशम में केतु--हृदय व जानु में पीड़ा, भाग्यहीन, कष्ट, माता की हानि, पिता को सुख ।
मास प्रवेश में लाभ में सुयं---आरोग्यता, राजा की कृपा, मित्रों द्वारा हर्षे, गौ आदि पशु एवं धन की प्राप्ति, लाभ । लाभ में चंद्र--राजा से लाभ, वेत वस्तु के व्यापार से लाभ, इवेत वस्त्र आदि 'का लाभ ।
लाभ में मंगळ--धन लाभ, प्रताप, राजा की कृपा, शत्रु नाश, स्त्री-पुत् "का सुख |
लाभ में वुध--इवेत वस्तु के व्यापार से लाभ, आरोग्यता, घन लाभ, पुत्र आदि 'का सूख । १
लाभ में गुरु--मित्र सुख, आयु और आरोग्यता की वृद्धि, पशुओं की प्राप्ति, स्त्री-पुत्र का सुख । लाभ में शुक्र--शुभ वस्तु के व्यापार से लाभ, जळू मार्ग से धन प्राप्ति, सुख, स्त्रियो द्वारा धन बढे, प्रियजनो की संगति । र लाभ में शनि--आरोग्यता, राजा से लाभ, घन लाभ, स्त्री सुख, ऐदवयं बढे । लाभ में राहु--नीच वर्ण से लाभ, स्त्री सुख, धन लाभ हो, कुछ हानि भी हो, शरीर सुख, ऐश्वर्य बहे ।
मास प्रवेश में व्यय भाव में सूयं--शरीर में पित्त रोग, नेत्र रोग, राज पीड़ा, "राजदंड में व्यय, भाइयों से विरोध ।
. व्यय में चंद्र---चिता, नेत्र रोग, अच्छे काम में धन का व्यय, घर मे. कलह, शत्रु -की उत्पत्ति ।
व्यथ में मंगल--राजा से भय, धन-हानि, शरीर कष्ट, नेत्र रोग, स्त्री पुत से विरोध ।
व्यय में बुध--राजा से भय, कुटुम्ब में कलह, अधिक खर्च, अल्प लाभ। , _ व्यय में गुरुराज भय, धन का खर्च, विदेश यात्रा, स्वजनों से विरोध, शरीर में क्षय ।
व्यय में शुक्र--अच्छे काम में खर्च, विदेश यात्रा, मित्र तथा भाइयों से विरोध, विछोह ।
व्यय में शनि --राज भय, धन का नाश, कुटुम्त्र से विरोध, पाँव, नेत्र और
“छाती में रोग । र व्यय में राहु--शत्रु का उदय, राज से पीडा, स्त्री को पीड़ा, धन का खर्च,
शरीर कष्ट ।