भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२१२ : सचित्र ज्योतिष दिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

व्यय में केतु--गुह्य और वस्ति रोग, पाँव और नेत्र में पीड़ा, शत्रु नाश, मामा

रहित हो, राजा तुल्य ।

भास कुण्डली के कुछ योग

(१) मासेश लग्न में हो तो घन और सन्तान का सुख हो, राजमान प्राप्त हो ।

बाहुबल का प्रताप बढ़े, शत्रु क्षय हो, कमं का उदय हो ।

(२) लग्न में शुक्र चंद्र युक्त हो तो उस मास में पुत्र एवं धन-घान्य का सुख हो

(३) लग्न में राहु युक्त चंद्र हो तो उस मास में ज्वर पीड़ा हो शरीर दुर्वेछ

हो जावे ।

(४) लर्न में गुरु हो चतुर्थ में बुध हो तो सुख हो, धन-धान्य की प्राप्ति हो।

(५) लग्न या अष्टम में क्षीण चन्द्रमा हो पाप युक्त या दृष्ट हो तो वह्‌ पात्र के

वदा हो, शस्त्र का भय, रोग या मृत्यु हो ।

(६) धन-भाव में शनि हो और लाभ में सूर्यं हो तो शरीर पीड़ा और नेत्र

रोग हो । ट

(७) तीसरे घर में मंगल और चंद्र हों तो स्त्री सुख हो उस माप में धन-धान्य

का लाभ हो।

(८) तीसरे घर में गुरु चंद्र हो चौथे शुक्र हो तो उस भाव में सब अरिष्ट कष्ट

आदि दुर होकर सुख प्राप्त हो ।

(९) तीसरे भाव में सूर्य हो, दशम में गुरु हो तो उस मास में अरिष्ट, कष्ट

आदि नाश होकर सुख हों 1

(१०) चतुर्थ में पाप ग्रह हों तो वाहन से गिरे और शरीर में बहुत पीड़ा हो ।

“1 १) चतुथं में सूयं और दशम में पाप ग्रह हों तो मानसिक चिता और राज?

भयहो।

(१२) मासेश पंचम भाव में हो तो संतान सुख और धन लाभ हो सर्वार्थ लाभ

प्रताप बृद्धि हो ।

(१३) चन्द्रमा से पंचम में गुरु हो, गुरु से नवम में चंद्र हो तो रोग और शत्रु का

नाश हो अरिष्ट का नाश हो ।

(१४) मासेश छठे भाव में हो तो शत्रु का उदय हो, रोग हो, धन और वाहन

की हानि हो, कार्य सिद्ध हो ।

(१५) जब वर्षश, मासेश, दिनेश, मु थेश पाप ग्रह से युक्त होकर ६-८ या १२

स्थान में हों तो कीति और सम्मान की हानि हो ।

(१६) मंगळ सहित चंद्र ६ या ८ स्थान में हो तो शस्त्र से या शत्रु से भय हो।

(१७) जब लग्नेश, मासेश, वर्षेश, मु थेश पाप ग्रह युक्त हो, पाप ग्रह से दुष्टि

होकर ६ या ८ घर में हो तो शत्रु भय, व्याधि ओर दुःख हो ।

(१८) सप्तम भाव में राहु के साथ चंद्र हो. तो उस मास में बहुत कष्ट हो,

बिशेष कर स्त्रियों को कष्ट हो |