सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 221, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंमासेश और दिनेश का फल : २१३
(१९) सप्तम स्थान में शुभ ग्रह हो तो उस दिन जुआ खेलने में जीतेगा ।
(२०) मासेश्च अष्टम हो तो अनेक कष्ट हो, संताप बढे, भय हो, शत्रु का उदय
हो, शत्रु घात, विषारिन की पीड़ा ।
(२१) लग्नेश और अष्टमेश अष्टम हो तो उस मास में अनेक प्रकार से शरीर
कष्ट हो, रधिर विकार हो ।
(२२) मंगल चन्द्रमा से युक्त अष्टम हो और मंगल के साथ सूर्य हो तो शरीर में
श्धिर स्राव हो, गुह्मेन्द्रिय में पीड़ा हो, दुःख बढ़े ।
(२३) जम्म लग्नेश के साथ सूर्य अष्टम हो तो गुल्योन्द्रिय मे पीड़ा हो दुःख वढे ।
(२४) नवम में मकर का मंगल हो, मु थेश पंचम हो तो अरिष्ट नहीं होता ।
(२४) मासेश नवम में हो तो भाग्योदय हो, स्त्री व संतान का सुख हो, मित्र
लाभ व धर्म की वृद्धि हो, धनागम हो, सर्वार्थ लाभ हो ।
(२६) नवम में मंगळ शुक्र से युक्त हो तो उस महिने में अरिष्ट और कष्ट का
नाश हो, सुख हो ।
(२७) लग्नेश नवम में हो, नवमेश पंचम हो तों भाग्योदय हो, सुख लाभ हो ।
(२८) नवम में शुभ ग्रह हों तो धन, धर्म गौरव व कीति बढे।
(२९) बारहवें स्थान में मुथा हो तो अभीष्ट की प्राप्ति न हो, चोर का भय,
शर्म अर्थं का नाश, मित्रों को कष्ट उद्यम हीन हो ।
(३०) व्यय में शुभ ग्रह शुभ कां में व्यय कराते हैं, २-१२ स्थानों में पाप ग्रह
हानि करते हैं, इन दोनों घर में पाप (पाप कतंरी योग) हो तो रोग हो । शुभ ग्रह
की कतरी शुभ होती है।
(३१) जिस मास का मासेश केन्द्र में हो, शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो धन और
'सुख की बढ़ती हो, कष्ट दूर हो ।
(३२) लग्नेश केन्द्र में हो, शुभ ग्रह से दुष्ट हो तो अपनी दशा में धन कीत्ति
और सुख की वृद्धि करे ।
(३३) लग्नेश मासेश वर्षेश बलवान होकर केन्द्र त्रिकोण या लाभ में हो राज्य
:छाभ आदर, यश प्राप्त हो नीरोग्यता प्राप्त हो, शत्रु नाश हो ।
(३४) चंद्र या ग्न से केन्द्र त्रिकोण या लाभ में बलवान शुभ ग्रह बैठे हों, पाप
अह ३, ६, ११ स्थानों में हो तो यश सन्मान भोग-विलास आदि सुख प्राप्त हों ।