भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२१८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(४) चतुर्थ में-शरीर पीड़ा, रोग, शत्रु से भय, मन में संताप (अशान्ति):

उद्योग में हीनता, निदा, वन्धुओं से विरोध, भय और दुःख की वृद्धि, राजा से भय,.

प्रतिज्ञा भंग ।

(५) पंचम में--धन लाभ, श्रेष्ठ बुद्धि, पुत्र लाभ, राजा की कृपा, प्रताप की'

वृद्धि, अनक भोग विलास, देव ब्राह्मण का पूजन, शरीर सुख, मन की व्यथा दूर हो,.

शत्रु का अपमान हो ।

(६) षष्ठ में -देह दुर्बल, शत्रु की वृद्धि, रोग हो, चोर व राजा का भय, कार्ये

और धन का नाश, वुद्धि भ्रंश, काय में पछतावा, कुटुम्व से बैर ।

(७) सप्तम में--स्त्री तथा बांधव से दुःख, शत्रु से भय, धन धर्म का नाश,.

उत्साह भंग, रोग और शोक हो, मति भ्रम, विरुद्ध कार्ये की चेष्टा हो, झंझट हो

(=) अष्टम में--शत्रु व चोर का भय, धन और धम का नाश, दुव्येसन , रोगः

हो, बल नाश, विदेश गमन, कलह से व्याकुलता, असंतोष, वर्ष भर अशुभ फल रहे।.

(९) नवम में--धर्म कायों में उत्साह, स्त्री पुत्र का सुख, भाग्योदय, परम यश,.

देव ब्राह्मण की पूजा, राजा से धन लाभ, पद प्राप्ति, कुटुम्बी व मित्रों से हित हो।

(१०) दशम में--राजा की कृपा, कीति विद्या धन की वृद्धि, परोपकार, सत्‌

कर्म की सिद्धि, देव ब्राह्मण की भक्ति, मनोरथ सिद्धि, अच्छी पदवी ।

(११) लाभ में--भाग्योदय, आरोग्यता, चित्त की प्रसन्नता, राजा के आश्रय सेः

धन लाभ, सु मित्र तथा पुत्रों से अभिमत प्राप्ति, मनोंरथ सिद्धि, ऐइवयं बढ़े ।

(१२) व्यय में मुन्था--अघिक खच, शरीर कष्ट, दुष्ट संगति, देह में रोग, घन"

और धर्म की हानि, सज्जनों से भी वर, उद्योग में विफलता, देव पूजा से चित्तः

उच्चाटन, लोगों से विरोध, कुटुम्ब से दुःख ।

वषं में ग्रह अनुसार मुन्था का विशेष फल

(१) सुर्ये-मुन्था सूर्य राशि में या सूर्य युक्त हों या किसी भाव में स्थित सूर्ये

से दृष्ट हो तो राज्य लाभ हो, राजा से मिलाप, गुणों की प्राप्ति हो दुसरे अच्छे.

स्थान की प्राप्ति हो भोग विलास आदि का सुख हो, ऐश्वयं मान वढे, शत्रु से

रहित हो ।

(र) चन्द्र--मुन्था चन्द्र राशि में या चन्द्र युक्त या दुष्ट हो तो धर्म और यश

की वृद्धि, निरोगता, संतोष और बुद्धि की वृद्धि हो । यदि पाप दुष्ट हो तो अत्यन्त

क्लेश होता है ।

(३) मंगल- यदि मंगल युक्त या दुष्ट या मंगल की राशि में हो तो पित्त

प्रकोप बढ़े गरमी का प्रकोप हो, शस्त्र से चोट लगे और. रुधिर पीडा हो, बन्ध्रुओं

और मित्रों में अरुचि, घर और भोजन में सुख न मिले, कुमति बढ़े यदि वंसी मुंथा

शनि से दुष्ट हो या शनि के घर में हो तो उक्त फल विशेष रूप से होता है ।

(४) बुध--यदि बुध युक्त या दुष्ट या बुध की राशि में हो या शुक्र युक्त

दृष्ट या शुक्र की राशि में हो तो स्त्री लाभ, बुद्धि वढे, अधिक यश हो, घर्मे ओर