सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपमपपदपपउथ रमट डक ६४८:४-५०५२५-०४-बप्फनन- कळ र्या रमे
मुन्या का फल विचार : २२१४
निधन--मुन्येश त्रिराशीश जन्म लग्नेश ये अस्त सप्तम में हों वर्षेश नीच का
हो तो उसका निधन हो कोई भी उसकी रक्षा नहीं कर सकता ।
अरिष्ट दूर धन प्राप्ति--मुन्येश निज भाग्य स्थान में हो तथा उच्च में होकर
आवी मित्र से दृष्ट हो तो अरिष्ट नाश होकर धन रत्न सुवर्ण आदि की प्राप्ति
।
पेट में रोग--ुन्थेश अस्त हो लग्नेश नीच में हो तो उस वर्ष अरिष्ट हो औरः
पेट में रोग हो ।
प्रताप सन्मान--मुन्येश ११-३-१-४-७-१० स्थान में हो तो प्रताप बढ़े राजाः
से सन्मान प्राप्त हो ।
अरिष्ट नाश--मुन्थेश नवम स्थान में हो उच्च में हो शुभ ग्रह या मित्र ग्रह से
दृष्ट हो तो धन वाहन सुवर्ण रत्न आदि प्राप्ति होकर अरिष्ट दूर हो ।
गुल्मादि रोग अरिष्ट--मुन्येश अष्टम हो मुन्या छठे घर में होतो उदर मे
गुल्म आदि रोग हो स्त्री को पीड़ा हो अरिष्ट हो ।
मृत्यु--मुन्येश और लग्नेश ६-८ घर में क्रूर ग्रहों से युक्त हों तो अपनी दशा में _
मृत्यु करते हैं यदि शुभ दृष्टि हो तो आधा फल हो ।
अरिष्ट नाश--मुन्थेश्ष सहज भाव में शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो सप्तम में सूयं
हो तो अरिष्ट नाश हो ।
लाभ--मुन्येश पंचम हो उसका स्वामी नीच का भाग्य स्थान में हो तो बहुत
लाभ हो राजा तुल्य करें। _
अरिष्ट नाश--मुन्येशा केन्द्र मै हो बलवान 'लग्नेदा केन्द्र में हो और वर्षेश सप्तम
हो तो मुंथा कृत अरिष्ट का नाशक हो 9
अरिष्ट नाश--मुन्येश तीसरे घर में जन्म लरनेषा और सौम्य ग्रह से युक्त हो
तो सम्पूर्ण अरिष्ट नाश हो ।
निरोग्यता-मुन्येश दशम में हो सौम्य ग्रह से युक्त दृष्ट हो तो निरोग्यता, अर्थ
की प्राप्ति होकर बाहुबल का प्रताप बड़े।
मास प्रवेश में माब गत सून्या फल
(१) लग्न में मास मुन्या-राजा से घन का लाभ और यश, शरीर सुख, मित्र
का लाभ, स्त्री के साथ विलास सुख, पुत्रों में हर्ष 1
(२) द्वितीय में-राजा से धन लाभ, शत्रु नाश, मित्रों से सुख, मिष्ठान्न भोजन,
०, श्रेष्ठ बुद्धि न
(३) तृतीय में-राजा से धन का लाभ, पराक्रम, बड़ी बुडि, भाई से व स्वजनो
से सुख, अनेक विलास । 9
(४) चतुर्थ में-धन की हानि, खेती की हानि, शत्रु भय, शरीर दुर्बल,
अधिक दुःख । ुँ
(५) पंचम में-पुत्रों से सुख, बुद्धि बढ़ो, कार्यों की सिद्धि, कीर्ति हो, देव ब्राह्मण
में भक्ति ।