भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२२२२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

(६) षप्ठ में-राजा से भय, चोर से धन हानि, वलहीन, पुत्र को कष्ट, कार्य “में शत्रुता बढ़े ।

(७) सप्तम में-स्त्री को कष्ट, शरीर में पीड़ा, धन नाश, शत्रुता बढ़े, मानसिक

चिन्ता ।

(८) अष्टम में-धन हानि, रोग वृद्धि, शत्रुता बढ़े, मित्र चिन्ता, वळ और धन

` से भय।

(९) नवम में-भाग्य की वृद्धि, स्वजनों से सुख, प्रसिद्धि प्राप्त हो, पुत्र आदि की

शक्ति में वृद्धि । है

(१०) दशम में-राजा से मनोरथ सिद्धि, स्त्री का सुख, स्वजनों से सुख,

“शरीर सुन्दर । :

(१०) लाभ में-राजा से धन प्राप्ति, सुवर्ण आभुषण वस्त्र तथा धन का लाभ,

  • देव ब्राह्मण की भक्ति, स्त्री का सुख ।

(१२) व्यय में-मन में व्याकुछता, अति खर्च; राजा और शत्रु से भय, खेती -से व्यय ।

अध्याय २४ .

सहमेश का बल विचार .

जिस स्थान में सहम हो उस राशि का स्वामी सहमेश कहलाता है ।

सहमेश अपने उच्चादि शुभ स्थानों में होकर लग्न को या अपने सहम को देखे *तों सहम बलवान होता है । जो लर्न को न देखे और बल में निर्वल हो वह निर्बल होता है। १ जन्म कालिक सूर्य राशीश, २ जन्म कालिक चन्द्र राशीश, ३ जन्म मास की पूर्ण मासी जिस लग्न में अन्त हो उसका स्वामी, ४ जन्म मास की अमावस्या जिस लग्न में अन्त हो उसका स्वामी इन का बल भी विचारना । जो ग्रह पंचवर्गी बल में ५ से कम बली हो तथा हर्ष स्थान में न हो लग्न को न देखे वह निर्बल होता है। जो त्रैराशिक (द्रेष्काण) मुसल्लह (नवांश) लघु स्थान में भी हो और लग्न को देखे तो भी बली होता है। स्वगृहोच्च-महाअधिकार है । स्व हृद्य मध्यम और स्वद्रेष्काण, स्व नवांश स्वल्प अधिकार हैं । सहम--जो सहम अपने स्वामी जो चाहे शुभ या पाप ग्रह युक्त दृष्ट हो तथा" शुभ ग्रह युक्त व दृष्ट हो तथा सहमेश पूर्वोक्त प्रकार से बली हो तो उस सहम की वृद्धि होती है।

जो सहम शुभ ग्रह तथा अपने स्वामी से युक्त दृष्ट न हो वह सहम निर्वल होता -है। फल देने में उस की सामं नहीं रहती ।