सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 240, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें२३२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वषं फल खण्ड
: लग्नेश या. वर्षेश केन्द्र त्रिकोण में हो, मुन्थेश बली हो तो अरिष्ट नाश होकर
सुख और अथं लाभ हो ।
लाभेश लग्न में हो. वर्षेश शुभ ग्रह युक्त लाभ में हो या दोनों दक्षम भाव में हों
तो अरिष्ट दूर हो। :
लग्नेश गुर लर्न में हो बलवान लाभेश से दुष्ट हो तो सब अरिष्ट दूर हो ।
` वर्ष में पाप ग्रह लग्न में न हों वा चन्द्र चतुर्थ व लाभ में सोम्य ग्रह युक्त हो
या बली चन्द्र शुभ ग्रह युक्त लग्न या केन्द्र में हो या गुरु या शुक्र सौम्य ग्रह युक्त
हो तो सव अरिष्ट दुर हो ।
: वर्ष में लग्न और दशम का स्वामी एक हो तो सब अरिष्ट दूर हो सुख अर्थ
लाभ वा राजा और मित्रों से यश मिले ।
: लग्न में गुरु मीन का हो पाप युक्त दुष्ट न हो तो सब अरिष्ट दूर हो ।
- गुरु चन्द्रमा से सप्तम में हो या उससे युक्त हो तो अरिष्ट नाश हो सुख और
अर्थं लाभहो। `
गुरु से नवम चन्द्र हो चन्द्र से पंचम गुरु हो. तो शत्रु और रोग का नाश हो सब
अरिष्ट दूर हो ।
मुन्था से सूर्य या मंगल पंचम स्थान में हो तो आरोग्य हो अरिष्ट नाश हो ।
बुध, गुरु, शुक्र इनमें से कोई एक ग्रह भी केन्द्र में शुभ ग्रह से युक्त हो नीच का
न हो भौर न शत्रु ग्रह के साथ हो तो सब अरिष्ट दूर हो ।
राहु शुभ युक्त या दृष्ट तीसरे या ११ वें स्थान में हो तो लग्न या मुन्था के
अरिष्ट को नाश करता है ।
मुन्था के साथ सूर्य या मंगल हो तो आरोग्यता देता है अरिष्ट नाश करता है ।
. जन्म लग्न स्वामी गुरु युक्त केन्द्र में हो और लाभेश से युक्त या दृष्ट हो तो
सब अरिष्ट नाश हो ।
वर्ष लग्नेश्च बली होकर केन्द्र में हो या.वर्ष और ठग्न का स्वामी उच्च में हो
सोम्य ग्रह केन्द्र या लाभ में हो तो सुख हो सव अरिष्ट दूर हों ।
मंगल युक्त चन्द्र उच्च का केन्द्र त्रिकोण या तीसरे घर में हो तो धन लाभ हो
अरिष्ट नाश हो ।
लग्नेश और लाभेश स्वगरही हों या केन्द्र त्रिकोण या लाभ में बलिष्ट हों तो
संब अरिष्ट दूर हों ।
एक ही गुरु, बुध, चन्द्र, शुक्र केन्द्र में शुभ ग्रह युक्त हो नीच का या अस्त न हो
तो सम्पूर्ण अरिष्ट दूर करता है।
अरिष्टं नाश-जिस वर्ष में लरनेश दशमेश एक हो तो सब अरिष्ट दूर हों राज्य
से लाभ और मित्रों से यश प्राप्त हो ।
बलवान गुरु केन्द्र में हो उस पर सौम्य ग्रह की दृष्टि हो तो धन धान्य का लाभ
हो ग्न का किया अरिष्ट दूर हो। _
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