भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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वषं में अरिष्ट विचार : २३३

(१) लग्नेश स्वग्रुही होकर लग्न में हो उसका जों उच्च स्थान हो उसका स्वामी

अपने उच्च में बैठकर देखता हो तो राज्य लाभ हो ।

(२) शुभ ग्रह अपने उच्च का हो और लग्न में हो और सव शुभ ग्रहं बलवान

'होकर लाभ या त्रिकोण में हों तो अचानक राज्य लाभ हो यदि ये ग्रह स्वग्रही आदि

हों तो थोड़ी उन्नति होती है ।

(३) लग्नेश स्वगृही लग्न में हो या मंगल उच्च का हो तो राज्य लाभ हो ।

(४) मंगल वलवान धन स्थान में हो तो अचानक अधिक शोयं बढ़े ।

(५) जव मुन्येश लग्नेश या जन्म लग्नेश वली होकर केन्द्र त्रिकोण लाभ या धन

"स्थान में हो तो वस्त्र सुवर्ण और सुख का लाभ हो ।

(६) नवमेश वलवान हो और धनेद शुभ ग्रहों से युक्त हो पाप ग्रहों की दृष्टि न

'हो तो सुवणे और सुख का लाभ हो धमे में रुचि हो धन धारण से युक्त लोगों से प्रीत

'हो लक्ष्मी का भोग करे ।

(७) यदि गुरु केन्द्र लाभ या ३-४-९ स्थान में हो या जन्म लग्नेश स्वगृही हो "तो राज्य लाभ हो ।

(८) जब चन्द्र बुध गुरु शुक्र उच्च में या स्वगृही हों लग्न से केन्द्र लाभ या

तृतीय में हों अपने मित्र से युक्त या दृष्ट हों और वलवान हों तो शत्रु का नाश हो

वाहन रत्न वस्त्र देश का लाभ स्त्री पुत्र से अनेक प्रकार से सुख मिले ।

(९) जब चतुर्थेश थे स्थान में वलवान हो या बलवान शुभ ग्रहों से युक्त या

'दृष्ट हो तो राज्य लाभ दो ।

(१०) केन्द्र में सब शुभ ग्रह हों पाप ग्रह २-६-११ घर में हों और बलवान हों

मतो राज्य लाभ हो ।

(११) जव वृष लग्न में शुक्र, बुध और चन्द्र हों तथा गुर केन्द्र में हो तो राज्य

ऱहाभ हो ।

(१२) मीन लग्न में गुरु या शुक्र हो लाभ में मंगल हो तो राज्य लाभ हो ।

(१३) केन्द्र में बलवान चन्द्र शुभ ग्रहों से युक्त पाप ग्रह से रहित हो अथवा

अकेला हो तो राज्य लाभ हो। परन्तु यदि नीच का अथवा बलहीन चन्द्र हो तो

“राज्य लाभ नहीं होगा ।

(१४) जब चन्द्रमा और लग्नेश दशम घर में हों शुभ ग्रहों से दुष्ट हों तथा शुभ

ग्रह अपने उच्च आदि स्थानों में हों तो निश्‍चय राज्य लाभ हो।

(१५) लग्नेश शुभ ग्रह हो चन्द्र तथा लग्नेश दञ्चम हों ओर बलवान हों ओर

श्शुभ ग्रह से दृष्ट हों तो राज्य लाभ हो ।

(१६) ककं लग्न में गुरु हो दशम में चन्द्र हो इनका इत्यशाल योग हो सूर्ये स्व-

'शुही हो तो राजयोग होता है ।

(१७) दशम में उच्च का सूर्ये हो कर्क लग्न में गुरु हो धन में चन्द्र हो तो राज

योग हो ।