सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 243, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंछ
किक के 4६ दोष: २३४:
(द) गुरु या शुक्र अस्तंगत दो या नीच थे ही था बाद बडी थि आक्राति हवो तोः घन एवं राज सुख का नाश हो ।
(९) जब शुभ ग्रह आश्रय दीन द्वा दथा पाप ग्र केसर थे दडट्टीन या वकी हों: तो धन का नाश होता है । (१०) जन्म का द्वादशेदा यदि वर्ष में दशय स्थान में पढ़ें और अपने स्वामी से या शुभ ग्रह से युक्त दृष्ट न हो ददामेश शत्रु या घाप ग्रह दे युक्त द्रो तो धन का
नाश हो।
(११) जब पंचाधिकारियों में से कोई भी ग्रह केन्द्र त्रिकोण या छाभ में बली |
होकर न बैठा हो. शेष ग्रह पाप ग्रहों के साथ हों या उनसे दृष्ट द्रां या बळहीन हों तो:
धन या सुख का नाश हो ।
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अध्याय २६
ताजिक के १६ योग
इन योगों के नाम फारसी भाषा में दैवज्ञ पं० नीलकंठ ने अपनी पुस्तक नीलकंठी;
में दिये हैं। इनका विचार वर्ष और प्रश्न में होता है। ये बहुत महत्व के योग हैं !
इनमें मुंथशिल योग का बहुत उपयोग हुआ है उसे अच्छी प्रकार से. समझ लेना: चाहिये ।
इत योगों के नाम
(१) इक्कवाल = इकवाल अर्थात् प्रताप-भाग्योदय शुभफल
(२) इंदुवार=इदवार. अर्थात् पीठ फेरना=भारयहीनता<दुर्भाग्य । अशुभ फळ |»
नं १ का उल्टा ।
(३) मुथशिल = मुंधसिंळ = इत्यद्याल = इतिसाल आप्त करना-संयोग-शुभ ।
इसके भेद :--
१ वर्तमान मुथसिल
२ पूर्ण 3
३ राश्यंत रादयादि ,, ४भविष्य कर?)
(४) ईशराफ = इशराफ = मुशरिफ = अपव्यय-खर्च करना-अशुभ ।
(५) नक्त<नक्तमुर्नकद-रोकड अशुभ दुसरों की सहायता से कायं सिद्ध करे
(६) यमयारजामिआरसंयोजकरशुभ । 0
(७) मणऊ-ममनुआ-निर्षधिक-मना । अशुभ ।
(८) कम्वूल = कम्बूलम्कुबूछ मकबूल स्वीकृतऱ्स्वीकार । शुभ । इसके १६: