भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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"२३६ ::सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वर्षफल खण्ड

*१ उत्तमोत्तम- कबूल ` ९ सम उत्तम कंबूल

“२ उत्तम मध्यम त १० सम मध्यम हर

३ उत्तम सम RE 1 ११ सम समाख्य मध्यम त)

"४ उत्तम अधम 0) १२ समाधम i

५ मध्यम उत्तम पं १३ अंधम उत्तम 0१

“६ मध्यम मध्यम 7) १४ अधम मध्यम ठ

५७ मध्यम सम Ee १५ अधम सम i

८ मध्यम अधम 1 १६ अधमाधम ` त

(९) गोरी कुबूल-गर कंबूल=्गेर कम्बूलम-गेर मकबूल-अस्वीकृत । अशुभ ।

(१०) खल्छासरच्खलासस्छूटा हुआ । अशुभ ।

(११) रहइ-निकम्मा-त्यक्त । अशुभ ।

(१२) दुफालि कुत्य-दुःफालि कुत्य, दुस्वार कुब्त्रत । कठिन प्राष्य-कठिनता से

मळ पाने वाला-सामान्य ।

(१३) दुत्यातपदबीर-दुत्थ दब्बीर- दुशवार तदवीर । दुष्प्राप्य । मध्यम

(१४) तंवीर-तम्बीर-तदवीर-उपाय । शुभ

` .(११) कुत्य-कुब्वत या कवी=वलिष्ठ=्वली शुभ

  • (१६) दुरफ=्दुरितोवा=रफअ= मिठानास्त्रना काम विगाइनाम्दुरित=भशुभ

*(१) इक्कवाल योग-अताप बढ़ाने वाला ।

सब ग्रह केन्द्र (१-४७-१० घर)

और पणफर (२-५-८-११ घर) में हों

आपोक्लिम (३-६-९-१२ घर) में कोई

ग्रह न हो तो इक्कवाल योग होता है।

जैसा यहाँ बताया है ।

फल-राजप सुख कुल अनुमान से होता है। जिसके वषं में अरिष्ट हो इस

इकवाल योग के होने से भंग हो जाता है।

५(२) इन्दुवार योग

यहाँ नं० १ के विपरीत है । सब ग्रह

: आपोक्लिम (३-६-९-१२ घर) में हों

“केन्द्र पणफर में कोई ग्रह न हों तो इन्दुवार

-योग होता है।