भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२४८ $ सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

कम्बूल योग के १६ प्रकार

(१) उत्तमोत्तम कम्बुल (९) सम उत्तम कम्वूल'

(२) उत्तम मध्यम ,, (१०) ,, मध्यम Ee

(३) „ सम (११) „.समाख्य र . (४) ,, अधम ही (१२) ,, अधम फर

(५) मध्यम उत्तम ,, (१३) ,, अधम उत्तम ,,

(६) ¬ मध्यम १2 (१४) „» मध्यम i

(७) छ सस गा (१५) गर सम गर (८) ,, अधम | (१६) अधमाधम छ

यहाँ ४ प्रकार के मुख्य भेद वताये गये हैं और इनके मिश्रण से १६भेद हो गये ।

(१) उत्तम-उच्च और स्वग्रही होने से उत्तम अधिकार ।

(२) मध्य़म-स्वहृद्दा, स्वद्रेष्काण, स्वनवांश, से मध्यम अधिकार ।

(३) अधम-शत्रु नीच ग्रह स्थिति से अधम अधिकार ।

(४) सम-जहाँ इन तीनों में एक भी अधिकारी न हों वह सम अधिकार है ।

चन्द्रमा के उपरोक्त ४ प्रकार के अधिकार में से कोई अधिकार हो और लग्नेश

कार्येश में से भिन्न अधिकार हो तो प्रत्येक के ४ भेद हो जाते हैं जैसा ऊपर वत्ताया है । इस प्रकार इसके १६ भेद हो जाते हैं।

. इसमें भी कार्यश के विचार से उपरोक्त

१६ भेद होंगे तो लग्नेश के विचार से भी

१६ भेद पृथक होंगे। इस प्रकार सब ३२ भेद हो जाते हैं ।

मंत्री विचार करने के लिए कल्पित

उदाहरण इसमें मित्र शत्रु और सम गृही का

विचार होता है आगे इनके उपयोग के लिए

मंत्री के विचार से नीचे उदाहरण देकर समझाया है ।

मैत्री स्याना सूय चंद्र मंगल वुध गुरु शुक्र शनि

मित्र ३-५ मग ० गु.सू.शु. ० सूःशुमं. मं.गु ०

९-११

शत्रु १-४ शु. वु.मं.श. चं.बु.श. चं.मंश. ० सू. चं.वु.मं-

६-१०

सम २-६ चबुः. गुणुश. ० सूगु.शु. चं.वु.श. चं.वु.श. सू-शु.गुः

८-१२

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