सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंताजिक के १६ योग : २४९
कंबूल के १६ योगों का स्पष्टीकरण
'कम्वुल के १६ चन्द्र कार्येश और लग्नेश भेद
१ उत्तमोत्तम स्वशुही या उच्च का स्वगृही या उच्च के
२ उत्तम मध्यम ११ „= __ स्वहद्दा स्वद्रेकाणया स्व नवांश में ३ उत्तम अधम ह ज्र शत्रु ग्रही या नीच में
४ उत्तम सम ii ती सम गृही सम हद्दा द्रेष्काण या नवाँश ५ मध्यम उत्त स्वहह्वाद्रेष्काण या में स्वगृही या उच्च में
नवांश में
६ , मध्यम स्वहद्दा द्रेष्काण या नवांश में
७ ,, अधम i म शत्रु गुही या नीच में
षप ,, सम 0 19 सम गृही हद्दा द्रेष्काण या नवांश में
९ अधम उत्तम स्वगृही या नीच में स्वगुही या उच्च में
१० ,, मध्यम i स्वहदा द्रेष्काण या नवांश में
११ ,, अधम „ 9 शन्रुगृहीयानीच में
११ „ सम „ २ संमगुहीहद्दाद्रेष्काण या नवांश में
१३ सम उत्तप सभ गृही हद्दाद्रेष्काण स्वगृही या उच्च में
या नवांश में
१४ ,, मध्यम 0) १ 12 स्वहद्दा आदि में
१५ ,, अधम है म „» शतु गृही या नीच में
१६ सम गर i „ सम गुही सम हददा सम द्रेष्काण सम
नवांश में
ऊपर जो कम्बूछ योग के १६ भेद बताये हैं इनका विचार ।
(१) लग्नेश कार्येश का परस्पर इत्थशाल हो ओर चन्द्रमा भी किसी के साथ
या दोनों से इत्यशाल करे तो १६ प्रकार के योग नीचे बताये अनुसार होते हैं।
(२) इनमें पहिले चन्द्रमा का अधिक्रार फिर लग्नेश और कार्ये का अधिकार
विचारना ।
(३) लग्नेश और कार्येश का अधिकार दोनों का एक सा होना । चन्द्र का अधि-
कार चाहे जैसा हो।
(४) चन्द्रमा अपने हदूदा में जहाँ कहा है वहाँ द्रेष्काण नवांश ही लेता क्यों कि
चना की हृद॒दा नहीं होती ।
१६ योगों का चक्र
भेद चन्द्र लग्नेश कार्येश फल
१ उत्तन+उत्तम उत्तम+उत्तम कार्य उत्तम करेगा
२ , मध्यम » +मध्यम फल मध्यम अवश्य होगा