सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंताजिक के १६ योग : २५%
चंद्र एवं कार्येश लग्नेश भी स्वगृही याः
उच्च में हों लग्नेश कार्यश का इत्थशाल हो,
चंद्रमा दोनों से इत्थशाळी हो तो उत्तमोत्तमः
कंवूल होता है। यहाँ संतान के प्रन में
कार्ये सूर्य शीघ्री ५° पर लग्न में हूँ और
लग्नेश मंगल मंदी ग्रह १८९ पर लग्न में है ।.
यहाँ सूर्यं उच्च का है और मंगल स्वगृही है ।
दोनों की एक रादिस्थ दृष्टि दीप्तांश के भीतर है। यहाँ चतुथं भाव में १२° पर
स्वगृही होकर १० स्थान की दृष्टि से लग्नेश कार्थेश दोनों को देखता है और दोनों
के साथ इत्यशाल करता है । यह कार्य उत्तमोत्तम करेगा ।
यहाँ पंचमेश सूयं कार्येश उच्च का लग्न
में है । लग्नेश मंगल उच्च का दशम में”
१८० पर है । दोनों का इत्थशाल योग है ।
उच्च का चंद्र चतुर्थ स्थान में १२° का
बैठकर लग्नेश कार्येश दोनों से इत्यशालः
करता है। इससे यह उत्तमोत्तम कम्बूः
हुआ ।
स्त्री विषय का सप्तम भाव का कार्येश शुक्र
पंचम में है । दोनों का इत्थशाळ योग है।
चन्द्र स्वगृही चतुर्थ भाव में ९° पर १०
भाव की दृष्टि से लग्नेश मंगल को देखता
है जो स्वगृही है। दोनों की दृष्टि दीप्तांश
के भीतर है केवल ३० का अंतर है । परन्तु,
यह चन्द्र कार्येश शुक्र को नहीं देखता । यहाँ चन्द्र का एक लग्नेश के साथ इत्यशार
होने से कम्वूल योग हो गया ।
(२) उत्तन मध्यम कंबुल
चंद्र स्वगृही या उच्च में हो लग्नेश कार्यश स्व हद्दा आदि में हों । यहाँ लग्नेश.
शुक्र अपनी हुदूदा में है। भाग्य विषय का विचार होने से भाग्येश बुध भी अपनी: