भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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२५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफड़ खण्ड

हदूदा में है । दोनों का इट्थशाछ योग होता

है । दशम में स्तर॒ग॒ही चंद्र एक स्थान दृष्टि

से लग्नेश से और दशम दृष्टि से कार्येश बुध

से इत्यशाळ करता है । इश्षते यह उत्तन

मध्यम कम्बूछ योग हुआ । भाग्य वृद्धि होगी

परन्तु मध्यम होगी ।

अन्य उदाहरण

पंचम स्थान सम्बन्धी प्रश्‍न में पंचमेश (कार्येश) सूर्य अपने नवांश में ६० पर है।

लग्नेश मंगल भी स्व नवांश में दशम में

११° पर है। दोनों का इत्थशाल योग है। चंद्र स्वगृही चतुर्थ में है । दोनों से इत्यशाल

करता है। इससे उत्तम मध्यम कम्वूल योग हुआ । इतका फल मध्यम होगा ।

(३) उत्तम अधम कम्बल

चंद्र स्वग्रही या उच्च में हो लग्नेश कार्येश नीच में या शत्रु गृही हो ।

तीसरे भाव सम्वन्धी प्रश्‍न में कार्येश

गुरु मकर का होने से नीच में हँ । और

लग्नेश शनि मेष में नीच का है। इन दोनों

का इत्यशाल योग है । स्वग्रृही चंद्र सप्तम में है इन दोनों से इत्यशाल करता है। इनमें यह उतम अभ्रम कम्नूक योग हुआ । इश्षमें कुछ प्रयत्न करने पर कार्य की सिद्धि होगी ।

(३) उत्तम सम क+बल

चंद्र उच्च का या स्वगृही हो लग्नेश

कार्येश सम ग्रह हद्दा आदि में हों ।

यहाँ रोग विषयक प्रश्‍न में लग्नेश सूर्य

अपने सम बुध के घर में १४० पर है।

कार्येश शनि अपने सम गृह शुक्र के घर में

१६° पर है । इन दोनों का इत्थशाल योग

; हे । चंद्र स्वगृही व्यय भाव में १३० पर

९। यह रेच कार्येश दोनों का देखता है इससे उत्तम सम कम्बल योग हो गयां । यहाँ मैत्री चक्र का उदाहरण पहिले दे चुके हैँ उसी के अनुसार मैत्री विचार से सम अह छिया है । अर्थात २-६ और ८-१२ स्थान के ग्रह सम समझे जायेंगे । इस थोग के फल से उत्तम कायं होगा रोग निवारण होगा ।