सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंताजिक के १६ योग: २५३
(५) मध्यम उत्तम कम्बल
2८: HS
चंद्र स्व हद्दा आदि में हो ळगनेश कार्येस' स्वगृही या उच्च के हों ।
यहाँ स्त्री विपयक प्रश्न में लग्नेश
कार्येश स्वगृही हैं । दोनों का इत्थशाल योग है । यहाँ चंद्र स्व नवांश में होकर लग्नेश
कायश दोनों को देखता है । इससे चंद्र की
चंद्र, कार्येश, लग्नेश सब स्व हुद्दा
स्वद्रे्काण आदि में हों ।
यहाँ लग्नेश कार्येश दोनों अपनी हुद्दा
में है । दोनों का इत्थशाल योग है। पंचम
भाव सम्वन्धी प्रश्न होने से कायंश शुक्रः
हुआ। लग्नेश बुध है। चंद्र स्वनवांश में
दशम भाव में होकर लग्नेश और कायाः
दोनों से इत्थशाल करता है। यह योग म ध्यम मध्यम कम्वूल हुआ । इसमें बहुत
यत्न करने से सन्तान होगी। (७) मध्यम अधम कम्बुल
चंद्र स्व नवांश आदि में हो लग्नेश कार्येश नीच गृही आदि हों ।
यहाँ भाग्य स्थान सम्बन्धी कायं होने से सूर्य कार्येश और लग्नेश गुरु दोनों नीच
गुही हैं। चंद्रमा स्व नवांश में है। लग्नेश
कार्येश का इत्यशाल योग है । चंद्र भी दोनों से इत्थशाल करता है यह मध्यम अधमः
कम्बूल हुआ । फलस्वरूप भाग्य सम्बन्धी कार्य के सम्पादन में वहुत कष्ट होगा ।
( ८) मध्यम सम कम्सूल
चंद्र स्व नवांश आदि में हो लग्नेश
कार्ये समग्रृह हृदया आदि में हो ।
यहाँ पंचम भाव सम्वन्धी कार्येण बुध मेप में अपने सम गुरु की हदा में
है। लग्नेश शुक्र अपने सम गुरु की हदा में
हैं। दोनों का इत्थशाल योग है । चंद्र स्व