भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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"२५४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड

नवांश में होकर दोनों से इत्यशाल करता है । यह मध्यम सम कम्बुल हुआ सन्तान

प्राप्ति अति प्रयास से होगी ।

चंद्र नीच, शत्रु गृही हो लग्नेश

कार्येश स्वगृही या उच्च में हो ।

यहाँ चतुर्थ भाव सम्वन्धी विचार

से कार्येश गुरु उच्च का है लग्नेश बुध

स्वगृही है । दोनों का इत्थशाल योग

है। चंद्र नीच का है वह दोनों से

इत्थशाल करता है । यह अधम उत्तम

कम्बूल हुआ। चतुर्थ भाव सम्वन्धी

प्रश्‍न या सुख की प्राप्ति परिश्रम से

होगी और अल्प सुख प्राप्त होगा ।

(१०) अधन मध्यम कम्बूल

चन्द्र नीच या शत्रु गुही हो लग्नेश

कार्येश स्व हुद्दा आदि में हो ।

यहाँ सन्तान प्रश्‍न में कार्येश शनि मीन

में अपने द्रेष्काण में है। लग्नेश बुध

अपनी हुद्दा में है। दोनों से इत्थशालू

करता है यह अधम मध्यम कम्वुल

|| हुआ। बहुत ही प्रयत्न करने से

पय सन्तान लाभ होगा । | (११) अधमाधम कम्बुल

चन्द्र Ss लग्नेश तीन नीच ऱ्या शत्नुगृही हों । यहाँ लग्नेश गुरु और सप्तम भाव का कार्येश बुध दोनों नीच में हैं इनका इत्थशाळ योग होता है । चंद्र भी नीच का है दोनों से इत्थशाल करता है यह अधमाधम कम्बूल हुआ इसमें स्त्री लाभ नहीं होगा ।

(१२) अवम सम कम्बुल

चन्द्र नीच या शत्रु गृही हो लग्नेश कार्येश सम गृही हद्दा आदि में हो । यहाँ

नवम भाव सम्बन्धी प्रश्‍न में कार्येश सूर्य अपने सम बुध के घर में हे । छग्नेश गुरु

भी अपने सम शनि के घर में है। दोनों का इत्थशाल योग है । चन्द्र मीन का

होकर दोनों से इत्यद्याल करता है । यह

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