भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

पृष्ठ 263, कुल 280 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 263

.

ताजिक के १६ योग : २५५

'अधम सम कम्बू हुआ । इससे कठिन उपाय से अति यल से कष्ट पुर्वक भाग्य "सम्बन्धी लाभ होगा ।

(१३) सम उत्तम कम्बल

चन्द्रमा पादोन (अधिकार रहित) हो अर्थात्‌ समग्रही हो और कार्येश लग्नेश

स्वगृह या उच्च में हो यहाँ धन सम्वन्धी कार्येश बुध और लग्नेक्ष सुयं स्वगृही हैं इनका इत्थशाल योग है । चन्द्र अपने सम गुरु के घर में है जो इन दोनों से इत्थशाल करता है । यह सम उत्तम कम्बूल हुआ । धन प्राप्ति उत्तमता से होगी । पादोन--२ प्रकार का है ।

(१) समगही हद्दा द्रेष्काण नवां आदि में सच या नीच या शत्रु गर्दी नहो दि में हो स्वग्रही उच्च स्व हृद्दा आदि में

(२) सम गृह हह द्रेष्काण नवांश के आदि व अन्त में सन्धि गत होने से ।

Fr

(१४) सन मध्यम कम्बूल

(१५) सम अधम कम्बुल

चंद्र सम- ग्रह हृद्दा आदि में हों और

लग्नेश कार्येश नीच या शत्रू ग्रही हों ।

धन भाव के प्रश्‍न में कार्यश बुध

में है। लग्नेश शुक्र भी नीच में है।

इनका इत्थशांल योग है । चंद्र अपने सम

गुरु के घर में है जो इन दोनों से इत्थशाल

करता है । यह समाधम कम्वूल हुआ ।

धन की प्राप्ति कष्ट साध्य होगी ।

चन्द्र समग्रह हृददा आदि में हो

लग्नेश कार्येश स्व हद्दा नवांश आदि में

हों लाभ प्रश्न में लाभेश मंगल कार्येश

यह्‌ स्व नवांश में हुँ । लग्नेश बुध भी स्व

नवांश में हैं । इनका इत्यशाल है । चन्द्र

अपने सम गुरु के घर में है जो इन दोनों

से इत्थशाल करता है । यह सम मध्यम

कम्बूल हुआ । लाभ मध्यम होगा यत्न

करने पर लाभ होगा ।