सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४५८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थं वर्षफल खण्ड
इसमें निर्वल कार्येश केन्द्र में हो कार्येश से लग्नेश ३-६-९-१२ घर में हो और
दोनों का इत्यशाल योग हो । यहाँ आपोक्लिम में ३ और ९ ही घर लिए जायेंगे।
क्योंकि ६ और १२ घर में इत्यशाल के लिए आवश्यक दृष्टि नहीं होती । केवल
३-९ स्थानों में ही दृष्टि होने से इत्यक्षाळ योग हो सकेगा ।
(२) कार्येश दुर्व होकर आपोक्छिम स्थान में हो और लग्नेश केन्द्र में हो इन
दोनों का इत्यशाल योग हो तो प्रथम उस भाव के कार्य को नष्ट करेगा पश्चात्
उस कायं को सिद्ध करेगा । (१) उदाहरण
लग्नेश बुध, कार्येश (दशमेश) गुरु
दोनों सूर्ये के साथ छठे घर में हैं अस्त
हैं । बुध के ४० गुरु के ५० हैं । दोनों का
इत्थशाल योग है । यहाँ लग्नेश कार्येश
` दोनों अस्त होकर पाप युक्त छठे स्थान
में हैं। इससे रद्द योग हो गया। राज्य
संबधी प्रश्न में राज्य सम्बन्धी कार्य का
नाश होगा ।
(२) उदाहरण
(२) यहाँ लग्नेश बुध पंचम भाव
कार्ये शुक्र से आपोक्लिम में ७? पर
है । कार्येश शुक्र केन्द्र में नीच का ८° पर
। है। यह निवे हुआ । लग्नेश कार्येश का
इत्थशाळ है। यह रद्द योग हुआ |
क्योंकि इत्थश्ञाळ कर्ता कार्येश नीच में
है । इस योग में प्रथम कार्य सिद्ध होकर
वाद में नष्ट हो जायगा ।
(३) यहाँ लग्नेश बुध शीघ्री ग्रह
नीच होने से निर्बल होकर केन्द्र में है।
पंचम भाव का कार्येण शुक्र लग्नेश से
आपोक्लिम में व्यय भाव में है। दोनों
का इत्यशाल योग है परन्तु लग्नेश नीच
में होने से रद्द योग हो गया ।
इसमें प्रथम कार्य नष्ट होकर फिर कार्य
की सिद्धि होगी ।