सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 267, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंताजिक के १६ योग : २५९
(१२) ढुष्फाली उत्य-कुत्य-शुमभ । दुष्फाली=दुःसाष्य । मंद गति वाला ग्रह स्वगृही या उच्च का या स्वद्रेष्काण, स्वहृददा, स्वनवांश में हो और शीघ्री ग्रह पादोन (अधिकार रहित) हो अर्थात् स्व, उच्च आदि अधिकार से रहित हो तव इन दोनों के इत्थशाल होने पर कार्य की सिद्धि कठिनाई से होती है । यदि शीघ्र ग्रह अस्त नीच शत्रु गृही वाल वृद्ध हो निवेल स्थान में स्थित होकर सी हो तो इस दुष्फाली कुत्थ योग में कार्य सिद्धि नहीं होगी और अनिष्ट ( गा।
यहाँ लग्नेश गुद स्व स्थानी लग्न में १६० पर है यह मंद ग्रह है। स्त्री सम्वन्धी अश्न में कार्येश बुध लाभ भाव में
१४? पर है यह शीघ्री यहाँ कार्यश और लग्नेश का इत्थशाल है। इसमें लग्नेश गुर स्वगृही होने से अधिकार युक्त
है और कायंश बुध पदहीन है। इससे
दुष्फाली कुत्य योग हो गया । इसमें स्त्री
सम्बन्धी कार्य कठिनता से सिद्ध होगा ।
यदि पदहीन शीघ्री ग्रह के साथ सूयं हो तो अस्त होने के कारण बुध निर्बल होक अनिष्ट फल देगा अर्थात् काये सिद्ध नहीं होगा । ST (१३) इुत्योत्यदिवौर योग या दुत्य दरी र-दुव्वार । तदवी र-दुष्प्राप्प-मध्यम । =दूसरे की सहायता से काम करने वाळा योग । जव लग्नेश कार्येश दोनों निर्बल हों अर्थात् अस्त नीच वत्रुगृही वक्री इत्यादि तेज से रहित होकर परस्पर इत्थश्ाली' हों । यदि इनमें से कोई ग्रह अन्य तीसरे ऐसे ग्रह से इत्थश्ाल करे जो स्वगृह उच्च स्वहदूदा द्रेष्काण नवांश आदि बळ से युक्त हो तो किसी दूसरे की सहायता से कार्य सिद्ध होगा ।
अथवा कोई दो शीघ्री ग्रह स्वग्रही उच्च स्वहद्दा द्रेष्काण नवांश मादि अधिकार सें होने से बल्वान हो और लग्नेश या कार्येश इनमें से किसी एक के साथ इत्यशाळ करे तो भी यह योग हो जाता है । किसी अन्य की सहायता से कायं सिद्ध होगा ।
और यहाँ स्त्री लग्नेश सम्बन्धी मंगल प्रश्न कर्के में का कार्येश नीच शुक्र में >>>
कन्या का नीच में है दोनों का इत्यशाळ योग होता है । यहाँ लग्नेश मंगल के
साथ उच्च का गुरु होने से स्त्री सम्बन्धी कार्य अन्य की सहायता से सिद्ध होगा
क्योंकि लग्नेश कार्येश निर्बल होने से कार्य सिद्ध नहीं होना था वह कायं
उच्चग्रही गुरु के मंगल से युक्त होने एवं
इत्यथशाल करने के कारण अन्य की सहायता से कार्य सिद्ध होगा ।