सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 270, कुल 280 में से
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२६२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
अन्यमत--चन्द्रमा निर्बल होने के प्रकार
(१) नीच गत (२) नीचस्थ ग्रह से इत्यशाल करे (३) सूर्यं के समीप १२० के
भीतर हो (४) राहु के मुख में (राहु के भोग्यांशों में) हो (५) पाप ग्रहों के साथ
१२? के भीतर हो (६) अपने स्वगृह से सप्तम मकर राशि में हो (७) धन रागि में
धन नवांश में हो । यह स्थान ककं से छटवाँ है आगे सातवाँ मकर होता है परन्तु
मकर राशि के पूर्व धन का अन्तिम नवांश धन का होता है। उसके वाद नीच
राशि मकर आरम्भ होती है । (=) अस्तंगत हो (९) अस्तग्रह के साथ मुंथसिली हो (१०) शत्रु गही हो । (१) क्षीण चन्द्र-कृष्ण एकादशी से शुक्छ पंचमी तक मानते हैं अन्य मत सेः
कृष्ण अष्टमी से शुक्ल अष्टमी तक ।
(२) राशि के अन्त्य २४०-४०' के ऊपर अर्थात नवम नवाँश में चंद्रमा क्षीण (अशुभ) होता है।
(३) मंगल शत्रु दृष्टि (४-१०-७१) से शुक्ल पक्ष के चन्द्र को देखे ।
(४) या शनि ऐसी दृष्टि से कृष्ण पक्ष के चन्द्र को देखे तो चंद्रमा सम्पूर्ण कार्यों
छ होता है । क्योंकि शुक्ल पक्ष में मंगल और कृष्ण पक्ष में. शनि तेजयुक्त नहीं होते 1
(५) चंद्रमा के दुरफ योग में दोष में न्यूनता--
(अ) शुक्ल पक्ष और दिन में विषम (पुरुष) राशि में बैठा शनि चंद्र को देखे ॥
(व) तथा कृष्ण पक्ष और रात्रि में सम (स्त्री) राशि में वैठा मंगल चंद्र को देखे तो चंद्र का पूर्वोक्त (दुरफ) निर्वेलता का दोष न्यून हो जाता है । इस प्रकार शनि
मंगल की दृष्टि न होने से दोष प्रवल ही रहता है परन्तु पूर्वोक्त. राशियों में बैठा
शनि या मंगल चन्द्र को देखे तो दुरफ का दोष कम हो जाता है ।
इस प्रकार कुत्य (बली) और दुरफ (निर्वळ) योग पूर्व बताये इत्थशाल आदि योगो में सव प्रकार से विचारना । जो कुत्य वल अधिक हो तो वह ग्रह अशुभ स्थानों में भी शुभ फल देता है । वह शुभ स्थानों में हो तो अत्यन्त शुभ फल देगा ही । जो दुरफ का बल (निर्वेलता) अधिक हो तो वह ग्रह शुभ स्थानों में अशुभ फल देगा । अशुभ स्थान में अत्यन्त अशुभ फल देगा ही ऐसा. सव बुद्धि से विचार करः फल कहना ।
अध्याय २७
दशा बिचार
ग्रहों के बल विचार से यहाँ दशा कही गयी है । पंचवर्गीः वळ में जो ५ विवा से कम वल हो वह बलहीन, ५ से १० तक बल हो १० से कम हो तो मध्यम. वळ और १० से २० विश्वा तक बल हो वहु पुर्ण वली समझा जायगा ।:
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