भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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दशा विचार : २६३

१. लग्न दशा फल

लग्न की अच्छी दशा=सोना मोती धन द्रव्य का लाभ अपने स्वामी से सन्मान श्रेष्ठ आरोग्यता, मध्यम दशा, मन में विकार, मानहीन लोगों की सेवा । अधम दशा=अपमान, अपव्यय, बुद्धि नाश, क्लेश, परदेश यात्रा । क्रूर लग्न की दशा-यदि मध्यम बल हो तो थोड़ा सुख, शरीर पीड़ा, धन का खच, देह दुवंछ विरोध या मरण ।

लग्न दशा-का फल अपने स्वामी के अनुसार कुछ और विशेष है । द्रेष्काण के अनुसार विचार ।

चर छरन में प्रथम द्वितीय तृतीय द्रेष्फाण शुभ मध्यम अशुभ

स्थिर ,, अनिष्ट शुभ समान फल

द्विस्त्रभाव ,, अशुभ मध्यम शुभ यहाँ शुभ ग्रह और स्वामी के योग दृष्टि से शुभ और पाप ग्रहु की दृष्टि योग से अशुभ फल होता है।

वर्ष में ग्रहों की दशा का फल

सूर्य की दशा-राज कुल से भय, पित्त से पीड़ा, धन का खर्च, भाइयों की

विपत्ति । सूर्य पूर्ण वली=अपने कुछ में प्रधान, तेज बढ़े, राजा हो, हाथी, घोड़े आदि

वाहन, वस्त्र सोना, रत्न लाभ यश, राजा से सन्मान, देव ब्राह्मण का पूजन ।

सूर्य मध्यम वली-पूणं वली का साधारण फल, ग्राम के शासन पंचायती आदि

कार्यों के अधिकार, सुख, नगर या ग्राम में द्रव्य लाभ, धैये से कुछ अनुसार सुख,

व्यापार में लाभ ।

सूर्य स्वल्प वली-स्त्रजन से दुःख, शत्रु से संघ, अपने पराक्रम की हानि, मति

भ्रम, पित्त रोग ।

सूर्य नष्ट बली-राजा या शत्रु से भय, धन हानि, स्त्री पुत्र मित्र से विरोध,

बुद्धि भ्रम, झगड़ा अनर्थ शोक, रोग, आधात ।

सूर्य निदित वल-धन हानि, कुटुम्ब से वैर, चोट, मनोवछ नष्ट ।

सूर्य का शुभ फल-वर्ष लग्न से ३, ६, १०, ११ घर में हो तो अशुभ भी सूर्य

शुभ फल देता है। मध्य वली हो तो उत्तम फल, हीन बली का मध्यम फछ और पूर्ण

बली अत्यन्त शुभ फल देता है ।

(२) चंद्र पुर्ण बली-अच्छे वस्त्र माला मणि मोती आदि प्राप्त हो, स्त्री लाभ

हो, राज्य सुख, भूमि लाभ, यश कांति वृद्धि, चित्त में सुख, राजा से पद की प्राप्ति।

चन्द्र मध्यम बली-उक्त फल मध्यम, व्यापार में सफलता, धर्म में वृद्धि, खेती से

लाभ मित्र वस्त्र घर इन से सुख, ऐश्वर्य बढ़े ।

चन्द्र अधम वली या स्वल्प बली-मित्र आदि इष्टजनों से विरोध, कफ रोग,

कांति नष्ट, धन धमं का नाश, कन्या का जन्म, चित्त में संताप, अल्प सुख भी हो ।

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