भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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दशा विचार : २६५

विशेष-नष्ट वली गुरु यदि ६-5-१२ घर में न हो तो आधा शुभ फल । हीन वली=्मध्यम फल, मध्यवली=शुभ फल । शुभ हो तो=अत्यन्त शुभ फळ । (६) शुक्र पूर्ण वछी-बाहन लाभ, आरोग्यता, संगीत से प्रेम, स्थान प्राप्ति, माला सुवर्ण वस्त्र स्त्री इनसे सुख, राज्य लक्ष्मी और धन की भोग प्राप्ति, कीति लाभ पुत्र मित्र से सुख । मध्यम वली शुक्र-व्यापार या खेती से धन लाभ, मित्र स्त्री पुत्र का सुख सव शास्त्रों को जानने वाला ।

अल्प वली शुक्र-ज्ञान यश और धन का नाश, बुद्धि का भ्रम, बुरे अन्न का भोजन, झंझट, रोगों से पीड़ा, शत्रु से झगड़ा, स्त्री पक्ष से विरोध, भ्रमण, सेवा निष्फल ।

शुक्र नष्ट वली-परदेश यात्रा, वंधुओं से विरोध, मति भ्रम, रोग, धन नाश पुत्र, स्त्री को विपत्ति, मागं में मृत्यु भय । 4 विशेष-६-८-१२ घर छोड़कर यदि शुक्र निदित भी हो तो आधा शुभ । उक्त से भिन्न स्थान में हीन वल भी हो तो मध्यम फल । मध्यम बली हो तो शुभ । शुभ हो तो अति शुभ ।

(७) शनि पूर्णं बली-नया घर जमीन और वस्त्र से सुख, वाग वगीचा कुथँ तालाव आदि का निर्माण राजा से तथा म्लेच्छों की संगति से धन लाभ देश का स्वामी हो ।

मध्यवली शनि-गधा ऊॅट पाखण्डी लोगों से धन लाभ, वृद्धा सत्री का संग, रस- हीन बुरा भोजन, कोष रक्षा करने वाळा या किला या मार्गे की रक्षा करने वाला ।

स्वल्प या हीन बली शनि-शत्रु या चोटों से कष्ट, दरिद्रता, स्वजनों से कलक

रोग भय हो और वायु का उम्र प्रकोप कलह वियोग !

नष्ट बली शनि-अनेक दुःख, त्रिदोष के प्रकोप से क्लेश, रोग वृद्धि, मरण तुल्य

कष्ट, स्त्री पुत्र मित्र परिजनों से विरोध, चोर से धन हानि, उद्वेग, नीच की सेवा ।

विशेष-३, ६, ११ स्थानों में शनि यदि हीन बली भी हो तो आधा शुभ फल ।

अल्प वली का मध्यम, शुभ का अति शुभ फल ।

वर्ष में राहु केतु का पंचवर्गी बल नहीं निकाला जाता इससे इनका साधारण

फल नीचे दिया है--

राहु की दशा में-राजा चोर विष अग्नि शस्त्र का भय, मति भ्रम, वन्धु हानि,

नीच से अपमान, वचन आदि भंग के कारण लांछन, पद च्युतिः कार्य की हानि,

येर में चोट । यदि शुभ युक्त होकर अच्छे घर में ६-८-१२ घर छोड़कर हो तो उसकी दशा अच्छी होती है । ओर शुभ हो तो इच्छा की पूर्ति हो धन प्राप्ति हो कीति बढ़े।

उच्च गत राहु शुभ फल तथा नीच गत बहुत अशुभ फल देता है।

केतु की दक्षा मे--राजा चोर शस्त्र से भय, चोट से पीड़ा, मिथ्या अपवाद,