भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished280 पृष्ठ

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ग्रहों का दृष्टिविचार : ४३

ग्रहों की दृष्टि

दृष्टि प्रकार भाव पर दृष्टिकला विश्वा फल

१ पाव दृष्टिज्डे ६-११ १५ ५ सुख, लाभ, स्नेह और बुद्धि बढ़ाने वाली ।.

अद्धं ,, सडे ४-१० ३० १९ गुप्तादि भेददृष्टि,मित्रों में भेद करे,विवाद

पौन , स्ट ५-९ ४५ १५ बढ़ावे, धन लाभ, सुख तथा निरंतर मित्रों

पूर्ण , =१ ७ ६० २० की वृद्धि करे, सदा अरिष्टकारक है, वुद्धि

विवाद और शत्रु वृद्धि करे ।

नीलकंठ मत से दृष्टि

दृष्टि प्रकार भाव पर दृष्टि कला नाम फल

१ पादोन (पौन) ५-९ ४५” प्रत्यक्ष स्नेहा परस्पर प्रीत, सुख, धन

सम्पत्ति देवे, कार्य सिद्ध करे ।

२ तृतीयांशेन ३-११ ४०” गुप्त स्नेहा स्नेह बढ़ाने वाली, सिद्धि करे

धन, सुख आदि देवे ।

३ चतुर्था ४-१० १५ गाप्तबैरा

४ पूर्णकला ७ ६० प्रत्यक्ष वैरा कार्य नाश अनिष्ट फल कलह हो ।

४ एक स्थान में ग्रह १ ० अत्यंत बैरा

उपरोक्त दृष्टि का फल

(१) यह बलवान दृष्टि है। मिलाप इसका नाम है। परस्पर प्रीत देती है स्वजनों

आदि को सुख, धन, सम्पत्ति आदि देती है। यह भाव जन्य सम्पूर्ण कायं साधन

करती है।

(२) यह षड भाग १०-० दृष्टि होती है । सर्वत्र कायं सिद्ध करने वाली है।

यह स्नेह बढ़ाने वाली है । पुत्र सुख धन और आयु देती है । ३-४-५ तीनों

दृष्टि क्षुत संज्ञक हैं । अनिष्ट फल देती हैं । कार्य नाश करती हैं । संग्राम फल आदि

क्लेश देती है।

ग्रह दृष्टि फल

पाप प्रहों पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो और शुभ ग्रहों की शुभ ग्रह पर दृष्टि हों

तो यथोक्त फल देते हैं । इसके विपरीत आधा फल देते हैं। भाव अपने स्वामी या

गुरु वुध शुक्र से युक्त हो और ये ग्रह उस भाव को देखते हों तो वह भाव पूर्ण फल

देता है । अन्य ग्रहों से युक्त या दृष्ट से उतना फल नहीं देते ।

ताजिकोक्त दृष्टि साधन

जातक में बताये दृष्टि साधन से ताजिक में भिन्न प्रकार का दृष्टि साधन

नीलकंठ ने बताया है ।

द्रष्टाग्रह-जों देखता है जिसकी दृष्टि जाननी है । ( दृश्य-दृष्ट )-ऐोप अंक

दृश्य-जिसे देखता है । जिस पर दृष्टि है ।